बायोग्राफी: वीरेंद्र सहवाग का क्रिकेट करियर और उनका परिवार

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बायोग्राफी: वीरेंद्र सहवाग का क्रिकेट करियर और उनके परिवार की सम्पूर्ण जानकारी 

बायोग्राफी: वीरेंद्र सहवाग का क्रिकेट करियर और उनके परिवार की सम्पूर्ण जानकारी

भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग की गिनती क्रिकेट इतिहास के सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में की जाती है। सहवाग टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक बनाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज हैं। इसके अलावा टेस्ट मैचों में 2 तिहरा शतक बनाने वाले 4 बल्लेबाजों में सहवाग का नाम भी शामिल है। सहवाग को मुल्तान के सुल्तान और नजफगढ़ का नवाब भी कहा जाता है।

जन्म और क्रिकेट की शुरुआत

वीरेंद्र सहवाग का जन्म दिल्ली के अनाज व्यापारी कृष्णा सहवाग के घर 20 अक्टूबर 1978 को हुआ था। उनका पारिवारिक घर हरियाणा में है लेकिन पूरा परिवार दिल्ली में ही रहता है। चार भाई बहनों में तीसरे नंबर के सहवाग ने अपनी शुरूआती पढाई विद्या स्कूल से की।

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उनके पिता की रूचि क्रिकेट में थी और इसी लिए मात्र सात महीने की उम्र में उन्हें प्लास्टिक का बल्ला खेलने को दिया। इसके अलावा उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया में भी पढाई की।

अंतरराष्ट्रीय डेब्यू

करियर की शुरुआत में मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज रहे वीरेंद्र सहवाग ने 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ मोहाली में अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। उस वनडे मैच में वह 7वें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए और 1 रन बनाकर आउट हो गए। गेंदबाजी में भी उन्होंने 3 ओवर में 35 रन दिए।

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अपना दूसरा वनडे खेलने के लिए उन्हें करीब 20 महीने का इंतजार करना पड़ा। शुरुआत में नीचे बल्लेबाजी करने वाले सहवाग को कप्तान सौरव गांगुली ने सलामी बल्लेबाजी करने का मौका दिया। सलामी बल्लेबाजी शुरू करने के बाद चौथे में मैच में उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 70 गेंदों में शतक बनाकर टीम में अपना स्थान पक्का कर लिया।

नवंबर 2001 में उन्हें टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला। छठवें क्रम पर बल्लेबाजी करने उतरे सहवाग ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 105 रनों की पारी खेली। जल्द ही उन्हें टेस्ट मैचों में भी टीम का सलामी बल्लेबाज बना दिया गया।

टेस्ट में तिहरा शतक

2004 में पाकिस्तान टीम पाकिस्तान दौरे पर थी। मुल्तान में खेले गए पहले मैच में वीरेंद्र सहवाग ने अपने 309 रनों की पारी खेली। यह टेस्ट क्रिकेट में किसी भी भारतीय बल्लेबाज का पहला तिहरा शतक था।

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इस पारी के 4 साल बाद 2008 में सहवाग ने फिर तिहरा शतक जड़ दिया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चेन्नई में उन्होंने 319 रनों की पारी खेली थी। यह टेस्ट क्रिकेट का सबसे तेज तिहरा शतक भी था। उन्होंने मात्र 278 गेंदों में 300 रन पूरे किये थे। उनके बाद मैथ्यू हेडेन का नाम आता है, उन्होंने 362 गेंदें ली थी।

क्रिकेट से संन्यास

2013 में भारत के लिए अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले सहवाग ने 20 अक्टूबर 2015 को अपने जन्मदिन के दिन क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी। उन्होंने भारत के लिए 374 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले सहवाग के बल्ले से 17,253 रन निकले। इसमें 38 शतक और 72 अर्धशतक शामिल था। संन्यास के बाद वह क्रिकेट कमेंट्री कर रहे हैं।

वीरेंद्र सहवाग का परिवार

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वीरेंद्र सहवाग के पिता का नाम कृष्णा सहवाग था जबकि माँ का नाम भी कृष्णा सहवाग ही है। 30 अक्टूबर 2007 को दिल का दौरा पड़ने से उनके पिता की मौत हो गई थी। उनकी दो बड़ी बहन मंजू और अंजू हैं जबकि एक छोटा भाई भी है। जिसका नाम विनोद सहवाग है।

सहवाग ने अप्रैल 2004 में आरती अहलावत से शादी की थी। उनके दो बेटे भी हैं। जिनका नाम आर्यवीर और वेदांत है।

अवार्ड्स

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वीरेंद्र सहवाग के अपने करियर में कई मुकाम हासिल किये हैं और उन्हें इसके लिए सम्मानित भी किया गया। इसमें अर्जुन पुरस्कार (2002), विश्व में विस्डेन अग्रणी क्रिकेटर (2008), आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर (2010), पद्म श्री (2010) शामिल है।

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