वीरेन्द्र सहवाग का खुलासा, इस शख्स ने उनके टेस्ट करियर में डाली जान, नहीं तो 2007 में ही खत्म हो जाता करियर 1

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग को टेस्ट क्रिकेट में सर्वकालिन महान सलामी बल्लेबाज माना जाता है। वीरेन्द्र सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में अपनी शैली और निरंतरता के दम पर वो मुकाम हासिल किया, जो उन्हें टेस्ट क्रिकेट के सबसे सफलतम सलामी बल्लेबाज में शुमार करते हैं।

टेस्ट क्रिकेट में 2006 में ही सहवाग का खत्म माना जा रहा था करियर

वीरेन्द्र सहवाग… टेस्ट क्रिकेट फॉर्मट में एक दौर में ऐसा नाम था, जिसने टेस्ट क्रिकेट की परिभाषा ही बदल कर रख दी। जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 2 तिहरे शतक के साथ ही कई ऐतिहासिक पारियां खेली।

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भारत के लिए वीरेन्द्र सहवाग ने साल 2013 में अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला और वो 100 टेस्ट खेलने वाले खिलाड़ी के क्लब में भी जगह बनाने में कामयाब रहे, लेकिन सहवाग का टेस्ट करियर 52वें टेस्ट के बाद से ही खत्म माना जा रहा था। आज वो सहवाग हमारे सामने नहीं होते जो जिसने टेस्ट क्रिकेट की काया ही पलट दी।

अनिल कुंबले ने बचाया वीरेन्द्र सहवाग का करियर

वीरेन्द्र सहवाग को साल 2007 में भारतीय टीम से बाहर कर दिया था। खराब फॉर्म के चलते भारत के लिए टेस्ट फॉर्मेट में सहवाग को करीब 1 साल तक बाहर रहना पड़ा। इसके बाद हर किसी ने मान लिया था कि अब सहवाग का टेस्ट करियर खत्म हो चुका है। लेकिन सहवाग के करियर में एक शख्स था , जिसने संजीवनी प्रदान की।

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लेकिन यहां से वीरेन्द्र सहवाग के टेस्ट क्रिकेट से करीब एक साल से भी ज्यादा समय से बाहर रहने के बाद अनिल कुंबले ने जान डाल दी। जो सहवाग 52 टेस्ट के बाद खत्म माने जाने लगे थे, वो कुंबले के विश्वास के बाद ऐसा खेले कि 100 से ज्यादा टेस्ट पूरे किए।

खुद सहवाग ने कहा, उन्होंने खत्म मान लिया था करियर

वीरेन्द्र सहवाग को 2008 में तात्कालिन कप्तान अनिल कुंबले ने ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर विश्वास के साथ मौका दिया, जिसके बाद साल 2011 तक तो सहवाग ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और भारत के सबसे बेहतरीन सलामी बल्लेबाज बने।

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खुद वीरेन्द्र सहवाग अपने करियर को लेकर अनिल कुंबले को सबसे बड़ा श्रेय देते हैं। सहवाग ने एक इंटरव्यू में माना कि उनके करियर में अनिल कुंबले ने जान डालने का काम किया। जिन्होंने उनके 2007 में ही खत्म होते दिख रहे टेस्ट करियर को बचा लिया। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सहवाग को मौका दिया गया, लेकिन पहले 2 टेस्ट में उन्हें टीम से बाहर रखा।

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मौका देकर अनिल कुंबले ने डाली जान

इसके बाद सहवाग को तीसरे टेस्ट मैच से पहले कैनबरा में खेले गए प्रैक्टिस मैच में मौका दिया, जहां कप्तान अनिल कुंबले ने उन्हें रन बनाकर विश्वास जीतने को कहा था। पर्थ में तीसरा टेस्ट खेलने से पहले भारतीय टीम ने कैनबरा में एक प्रैक्टिस मैच  था। और इस मैच से पहले कुंबले ने मुझसे कहा कि “50 रन बनाओ और तुम्हें पर्थ टेस्ट के लिए चुना जाएगा।”

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इसके बाद वीरेन्द्र सहवाग को पर्थ टेस्ट मैच में अनिल कुंबले ने प्लेइंग-11 में ले लिया, जहां उन्होंने 63 रन की करियर बचाने वाली पारी खेली। इसे लेकर सहवाग ने कहा कि “वे 60 रन मेरी जिंदगी के सबसे मुश्किल रन थे। मैं अनिल भाई द्वारा मुझ में दिखाए गए भरोसे को सही साबित करने के लिए खेल रहा था। मैं नहीं चाहता था कि कोई भी अनिल भाई पर मुझे ऑस्ट्रेलिया ले जाने के लिए उन पर सवाल खड़ा  करे। “

अनिल भाई ने कहा था, जब तक वो हैं कप्तान, उन्हें कोई नहीं कर सकता बाहर

सहवाग ने आगे कहा कि, “अनिल भाई ने कहा कि जब तक मैं कप्तान हूं, मैं टीम से ड्रॉप नहीं होऊंगा। यही वह बात है, जो हर खिलाड़ी अपने कप्तान से सुनना चाहता है। उसका भरोसा हासिल करना चाहता है। करियर के शुरुआती दिनों में यह भरोसा पहले मुझे सौरव गांगुली से मिला और फिर बाद में अनिल कुंबले से मिला।”

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