वीवीएस लक्ष्मण ने सुनाया वो किस्सा, जब उन्होंने टीम से कहा था बैग

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वीवीएस लक्ष्मण ने सुनाया वो किस्सा, जब उन्होंने टीम से कहा था बैग उठाओ और घर चलो 

वीवीएस लक्ष्मण ने सुनाया वो किस्सा, जब उन्होंने टीम से कहा था बैग उठाओ और घर चलो

अनिल कुंबले की कप्तानी में भारतीय टीम ने 2007-08 में चार टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया. इस बार ऑस्ट्रेलिया की कमान रिकी पोंटिंग के हाथों में थी. इस सीरीज को ऑस्ट्रेलिया ने 2-1 से जीता, लेकिन इसे दोनों देशों के बीच सबसे विवादित सीरीज में से एक माना जाता है.

वीवीएस लक्ष्मण ने सुनाया उस सीरीज के बारे में शानदार किस्सा 

वीवीएस लक्ष्मण ने सुनाया वो किस्सा, जब उन्होंने टीम से कहा था बैग उठाओ और घर चलो 1

भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी वीवीएस लक्ष्मण ने एक किताब लिखी है. जिसके जरिए उन्होंने कई खुलासे किए हैं. इसी दौरान उन्होंने एक और खुलासा उस सीरीज के बारे में किया है. लक्ष्मण ने लिखा है, टीम के खिलाड़ी उनके अम्पायर के फैसले से खफा थे. खिलाड़ी सीरीज छोड़ कर जान चाहते थे. इन खिलाड़ियों में मेरा नाम भी शामिल था. मैंने यहाँ तक कह दिया कि यहाँ रहने का कोई मतलब नहीं बैग उठाओ और घर चलो.  हालांकि टीम के कप्तान ने मामले को शांत किया. लेकिन अब मैं ये सोचता हूँ उन्होंने जो किया वो सही था.

भारत वो सीरीज 2-1 से हार गया था 

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मेलबर्न में पहले टेस्ट को 337 रन से जीतकर ऑस्ट्रेलिया ने जोरदार शुरुआत की. सिडनी में दूसरा टेस्ट 122 रन से जीतकर ऑस्ट्रेलिया ने 2-0 की बढ़त ले ली. हालांकि, यह टेस्ट भारत के खिलाफ गए अंपायरों के कई गलत फैसलों और हरभजन सिंह व एंड्रयू सायमंड्स के बीच हुए मंकी गेट विवाद की वजह से चर्चा में रहा.

पर्थ में तीसरे टेस्ट को 72 रन से जीतकर भारत ने जोरदार वापसी की. यहां से भारतीय टीम सीरीज ड्रॉ कराने की सोच रही थी, लेकिन एडिलेड में चौथा टेस्ट ड्रॉ रहने से सीरीज पर ऑस्ट्रेलिया ने कब्जा जमाया.

 लक्ष्मण ने किताब में ग्रेग चैपल की जमकर आलोचना की है 

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लक्ष्मण ने ‘281 एंड बियॉन्ड्स’ में लिखा कि चैपल के नेतृत्व में भारतीय टीम दो-तीन धड़ों में बंट गई थी. और खिलाड़ियों के बीच एक-दूसरे में विश्वास का घोर अभाव था.

इस दिग्गज ने लिखा कि कोच चैपल के कुछ अपने पसंदीदा खिलाड़ी थे, जिनकी बहुत ही अच्छी तरह से देखभाल की गई, जबकि बाकी खिलाड़ियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया. मेरी आंखों के सामने ही देखते-देखते टीम टुकड़ों में बंट गई.

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