इस टीम ने विरोधी टीम द्वारा 12 ओवर में बनाये गये लक्ष्य को 2 गेंद में ही हासिल कर लिया

sagar mhatre / 20 May 2016

साल 2006 में नेपाल की टीम ने एसीसी कप में सबसे तेज गती से लक्ष्य हासिल किया था. उस नेपाली टीम ने लक्ष्य को सिर्फ 2 गेंदों में हासिल किया था. नेपाल की उस टीम ने उस लक्ष्य को कैसे हासिल किया आइये हम बताते है.

नेपाल ने उस टूर्नामेंट के पहले मैच में कुवैत को आसानी से हराया था, और नेपाल का अगला मुकाबला म्यांमार से था. म्यांमार की टीम की रैंकिंग उस टूर्नामेंट में सबसे कम थी, और क्रिकेट का अनुभव भी उनको कम था. नेपाल ने पहले मैच में कुवैत को 317 रनों का लक्ष्य दिया था, और कुवैत को सिर्फ 36 रनों पर अॉल आउट किया था.

तो वहीं म्यांमार को अपने पहले मुकाबले में हांगकांग से हार मिली थी. हांगकांग ने म्यांमार को 442 रनों का लक्ष्य दिया था, और म्यांमार को सिर्फ 20 रनों पर अॉल आउट किया था. अब नेपाल का मैच म्यांमार से था, और नेपाल ने म्यांमार को टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करने बुलाया. नेपाल के ओर से महबूब आलम गेंदबाजी करने उतरे और फिर शुरू हुआ एक कमाल का मैच.

आलम ने पहले तीन गेंदों पर तीन विकेट लिए और म्यांमार की हालात खस्ता किया. उसके बाद 2 ओवर के बाद म्यांमार का स्कोर 4 रन पर 4 विकेट था.

म्यांमार की टीम पूरे पारी में बल्ले को गेंद भी नहीं लगा पा रहीं थी, और म्यांमार के आधे बल्लेबाज खाता भी नहीं खोल सके. म्यांमार ने 12.1 ओवर की बल्लेबाजी की, और सिर्फ 10 रन बना पायी. म्यांमार की ओर से जकारिया ने सबसे ज्यादा 20 गेंदी खेली, और एक रन बनाया.

नेपाल की ओर से आलम ने 6.1 ओवर की गेंदबाजी की, और 3 रन देकर 7 विकेट लिए. तो वहीं दास ने 6 ओवर की गेंदबाजी में 4 रन देकर 3 विकेट लिए. म्यांमार को तीन रन अतिरिक्त रूप में मिले. नेपाल के बल्लेबाज ने इस लक्ष्य का पीछा करते हुए पहली गेंद पर तीन रन लिए. फिर दुसरे गेंद पर भी तीन रन दौडे, और नेपाल का स्कोर 2 गेंद पर 6 रन हुआ. फिर उसके बाद गेंदबाज ने 2 लगातार वाईड गेंदें फेंकी, और बाद में फिर से वाईड फेंकी जो कीपर रोक नहीं पाया, और नेपाल ने 2 गेंदों में लक्ष्य हासिल करके इतिहास बना दिया.

म्यांमार में क्रिकेट की शुरूआत साल 2004 में हुई थी, जब अॉस्ट्रेलिया के कूछ लोगों ने वहां जाकर लोगों को क्रिकेट के बारे में बताया था. और फिर आईसीसी से म्यांमार को क्रिकेट खेलने की अनुमती मिली, और नेपाल के साथ उनका मैच हुआ. नेपाल की टीम उस समय अफगान से भी मजबूत मानी जाती थी.

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