दिलचस्प: जानिये आखिर भारत के सबसे बड़े फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट को क्यों कहा जाता है रणजी टूर्नामेंट? | Sportzwiki Hindi

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दिलचस्प: जानिये आखिर भारत के सबसे बड़े फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट को क्यों कहा जाता है रणजी टूर्नामेंट? 

दिलचस्प: जानिये आखिर भारत के सबसे बड़े फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट को क्यों कहा जाता है रणजी टूर्नामेंट?

जब गांधीजी पहली बार सन 1889 में पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए थे, उनके पास तीन लोगों का रेफरेंस था. इसमें से एक रेफरेंस रणजीत सिंह के नाम था. भारतीय क्रिकेट इतिहास में ये नाम बड़े अदब से लिया जाता है. भारतीयों में क्रिकेट का जुनून इसी खिलाड़ी ने पैदा किया था. देश के सबसे बड़े फर्स्ट क्लास क्रिकेट टूर्नामेंट ‘रणजी ट्रॉफी’ का नाम इन्हीं के नाम पर रखा गया है.

ये पहले ऐसे भारतीय क्रिकेटर थे, जो इंग्लैंड की ओर से टेस्ट मैच खेले और पहले ही मैच में सेंचुरी जड़ दी. क्रिकेट में इन्हें ‘रणजी’ नाम से जाना जाता था, आज इनकी पुण्यतिथि है.

गुलाम देश का होने की वजह से खेलने को नही मिला-

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रणजी 10 सितम्बर 1872 में गुजरात के काठियावाड़ में पैदा हुए, एक अमीर घराने में.  वहां के शासक ने उन्हें अपना वारिस बना लिया. रणजी को इंग्लैंड में पढ़ाई करने का मौका मिल गया. रणजी ने स्कूल की पढ़ाई ख़त्म कर केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया, लेकिन उन्हें केम्ब्रिज की टीम में जगह नहीं दी गई. क्योंकि वे एक गुलाम देश से आते थे, भारत से.

तब के केम्ब्रिज टीम के कैप्टन एफ.एस. जैक्सन ने भी बाद में ये माना था कि रणजी के टीम में सिलेक्ट न होने के पीछे कारण यही था. खैर, रणजी का बल्ला बोलता रहा और 1893 में लॉर्ड्स में ऑक्सफ़ोर्ड के खिलाफ खेलते हुए उन्हें ‘ब्लू’ अवार्ड दिया गया. ‘ब्लू’ अवॉर्ड केम्ब्रिज और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी सबसे अच्छे खिलाड़ी को देती हैं.

ससेक्स की ओर से खेलते हुए बनाए रिकॉर्ड-

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1895 में केम्ब्रिज छोड़ने के बाद रणजी ने ससेक्स की ओर से काउंटी खेलना शुरू किया. पूरे सीज़न में 50.16 की औसत से 1766 रन बनाए. 1896 के मई में ऑस्ट्रेलिया के उस समय के सबसे ताकतवर तेज़ गेंदबाज़ एरीन जोन्स की उन्होंने खूब धुलाई की. जून महीना आते-आते वे 4 सेंचुरी बना चुके थे.

ओपनर क्या टीम में भी नही लिया गया-

रणजी बेहतरीन बल्लेबाजी कर रहे थे. ऐसा लग रहा था कि उन्हें टीम में ओपनिंग बल्लेबाजी मिलेगी मगर उन्हें टीम से ही बाहर कर दिया गया. इंग्लैंड की टीम के लिए खिलाड़ी चुनते वक्त एम. सी. सी. के प्रेसिडेंट लॉर्ड हैरिस ने रणजी को टीम में लेने पर ऐतराज़ जताया. हैरिस एम. सी. सी. के प्रेसिडेंट बनने से पहले बॉम्बे (बम्बई) के गवर्नर भी रहे थे. उनका ये कहना था कि रणजी इंग्लैंड में पैदा नहीं हुए हैं और वे एक प्रवासी पक्षी की तरह हैं. इसलिए उन्हें टीम में नहीं लिया जा सकता.

साइमन वाइल्ड (जिन्होंने रणजी की बायोग्रफी लिखी) का कहना था कि अगर ऐसा कोई रूल था, तो वो हैरिस पर भी लागू होता. हैरिस ने 4 टेस्ट मैच खेले थे और वे खुद वेस्ट इंडीज में पैदा हुए थे. मगर हैरिस की ही चली और रणजी को टीम से ड्राप कर दिया गया.

दुनिया को बैकफुट पर खेलना सिखाया-

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रणजी अपनी बैटिंग टेक्नीक के लिए भी जाने जाते थे. उस समय बल्लेबाज़ फ्रंट-फुट पर ही खेला करते थे. रणजी ने पहल करते हुए फ्रंट-फुट के साथ-साथ बैक-फुट पर खेलना शुरू किया. उन्हें बै्क-फुट पर खेलने में माहिर समझा जाता था.

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