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भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया: क्यों धोनी को अब छोड़ देनी चाहिए कप्तानी?? 

पिछले कुछ दिनों से धोनी सवालों के घेरे में है. उनकी कप्तानी पर काफी सवाल उठ रहे है. 34 साल की उम्र में अब ऐसा लग रहा है कि, धोनी अपना जादू खो चुके है. विश्वकप 2015 के बाद से, उनकी कप्तानी में भारत एक भी सीरीज नहीं जीता है. और अॉस्ट्रेलिया दौरे पर अब उनपर कई सवाल उठ रहे है. भारत ने इस सीरीज में अब तक 1215 रन बनाए है, लेकिन भारत एक भी मैच जीत नहीं पाया है. उनकी आवाज में अब एक दर्द दिखता है.

उनकी कप्तानी में अब भारत 5-0 से सीरीज हार की कगार पर है, जो किसी को स्विकार नहीं होगी. भारतीय गेंदबाजी जब अच्छा नहीं करती, तब धोनी उनके पास आकर बात भी नहीं करते अब, और उप-कप्तान विराट कोहली आकर बात करते है.

देखा जाए तो, इस सीरीज में भारतीय गेंदबाज अॉस्ट्रेलियाई गेंदबाजों से ज्यादा अनुभवी है, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों से ज्यादा, अॉस्ट्रेलियाई बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों की धुनाई करते है.

 

जब भारत ये सीरीज हारा, उसके बाद धोनी अपने खिलाडियों को विश्वास देने के बावजूद, उनको विश्वास खोते हुए दिखाई देते है. जब कुछ महिनें पहिले न्यूजीलैंड को अॉस्ट्रेलिया से सीरीज हार मिली, जब मैकुलम ने काफी आक्रमक क्रिकेट खेला, और अपने खिलाडियों को लड़ना सिखाया, जिसमे धोनी पीछे छुटते हूए नजर आ रहे है.

धोनी को अपने खिलाडियों को विश्वास दिलाकर, उनमे जज्बा भरना चाहिए. इस भारतीय टीम में टेलेंट की कोई कमी नहीं है. लेकिन धोनी खिलाडियों को विश्वास नहीं दे पाए है. धोनी ने अश्विन को तेज विकटों पर खिलाया, जहां स्पिनरों को मदद नहीं मिलती है. तो जब रिशी धवन को खिलाया, तब उनपर ज्यादा विश्वास धोनी ने नहीं दिखाया, जिससे नये खिलाडियों का आत्मविश्वास तुट जाता है.

जब भारत तीसरा वनडे हारा, तब धोनी ने कहा था कि, अगर मै अश्विन को खिलाता, और हम हारते, तो लोग बोलते कि मै नये खिलाडियों को मौका नहीं देता. इससे ये साबित हुआ की, धोनी को नये खिलाडियों पर विश्वास नहीं है.

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