एक सदी से लंबी टॉस की परंपरा के साथ क्यों खिलवाड़ करना चाहेंगे : बिशन सिंह बेदी
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इंटरव्यूज

आईसीसी ने टॉस खत्म करने की कही बात तो भड़के बिशन सिंह बेदी ने सुनाया खरी खोटी

क्रिकेट का क्रेज़ दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. सभी फोर्मेट में होने वाले मैच को काफी ज्यादा पसंद किया जाता है. सभी क्रिकेट फ़ॉर्मेट का सबसे अहम पहलू होता टॉस. बिना टॉस के कोई भी खेल शुरू नहीं हो सकता. दो टीमों में से कौन पहले गेंदबाजी और कौन पहले बल्ल्लेबाजी करेगा इसका फैसला टॉस से ही होता है.

कई बार तो खिलाड़ियों के प्रदर्शन से भी ज्यादा, टॉस मैच का नतीजा निर्धारित कर देता है. दुनिया के बाकी खेलों के मुकाबले में क्रिकेट के खेल में टॉस की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. क्रिकेट और टॉस एक दूसरे के बिना अधूरे लगते हैं.

टेस्ट मैच से गायब हो रहा है टॉस 

लेकिन अब शायद क्रिकेट के खेल का यह सबसे अहम पहलू इस खेल से गायब हो सकता है. आईसीसी टॉस के लिए उछलने वाले सिक्के को क्रिकेट के इतिहास का हिस्सा बनाने पर विचार कर रही है और मुंबई में इसी महीने के आखिर में होने वाली क्रिकेट कमेटी की मीटिंग मे 2019 में शुरू होने वाली वर्ल्ड चैंपिंयनशिप में टॉस की भूमिका को खत्म करने पर विचार किया जा सकता है. खबर के मुताबिक अनिक कुंबले की अध्यक्षता वाली इस कमेटी के कुछ सदस्य टेस्ट क्रिकेट से टॉस को अलविदा कहने के पक्ष में हैं.

बिशन सिंह बेदी ने किया धन्यवाद 

पूर्व भारत के कप्तान बिशन सिंह बेदी केवल उन सदस्यों को “धन्यवाद” करना चाहते हैं, जिन्हें टॉस को पूरी तरह से ख़ारिज करने के लिए अपना मत नहीं दे रहे है. बेदी ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया द्वारा आयोजित आईसीसी कमिटी के नॉवेल आईडिया में कहा,

“टॉस को मैच से दूर करना? आप जानते हैं कि मैं वास्तव में इसे समझ नहीं पा रहा हूं. ये वास्तव में खेल की भावना के साथ खिलवाड़ है. सबसे पहले, आप एक सदी की लंबी परंपरा के साथ क्यों खिलवाड़ करना चाहेंगे?”

वेंगसरकर ने टेस्ट मैच को उसी हाल में छोड़ने की दी नसीहत 

वास्तव में पूर्व टेस्ट बल्लेबाज दिलीप वेंगसरकर एक कदम आगे बढ़कर कहा, “जैसा कि है, क्रिकेट के खेल में पहले से पहले बहुत दखल दी जा चुकी है. इस बात के संदर्भ में कि यह कैसे खेला गया था और आज यह कहाँ पर खड़ा है. हम उन चीजों को उन्ही रूप में क्यों नहीं छोड़ देते हैं जो टेस्ट मैच के दौरान होती हैं?”

 वेंगसरकर ने आगे कहा, “यदि यह पिच तैयारी में केवल घरेलू टीम के हस्तक्षेप के बारे में है तो केवल तटस्थ क्यूरेटर पेश करें. नहीं? तटस्थ क्यूरेटर का एक पैनल है जिस तरह आईसीसी के पास अंपायर और मैच-रेफरी का एक कुलीन पैनल होता है. ऐसी परंपरा से दूर क्यों न हो, जो क्रिकेट के आकर्षण में शामिल न हो, लेकिन जिससे दोनों भाग लेने वाली टीमों को प्रतियोगिता में बढ़ने का एक समान अवसर मिल जाए?”
 
वेंगसरकर ने कहा, “टॉस यही करता है, दोनों पक्षों को एक समान अवसर प्रदान करता है और यह चुनौती है जो टेस्ट क्रिकेट ऑफर करता है.”
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