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क्या हार्दिक और गुरकीरत पूरी करेंगे विशेषज्ञ ऑलराउंडर की खोज?? 

क्रिकेट डेस्क। भारतीय क्रिकेट को लंबे समय विशेषज्ञ ऑलराउंडर की तलाश है। कपिल देव को छोड़ दिया जाए तो अन्य कोई ऑलराउंडर दिग्गजों की श्रेणी में शामिल नहीं हो सका। कुछ समय के लिए इरफान पठान ने उम्मीद जगाई थी, लेकिन चोट और खराब प्रदर्शन के कारण वह भी प्रभावी साबित नहीं हो पाए। क्रिकेट को धर्म मानने वाले देश भारत में हरफनमौला खिलाड़ियों की कमी साफ देखी जा सकती है।

मौजूदा भारतीय खिलाडि़यों में अच्छा ऑलराउंडर बनने की क्षमता आंकी जा रही है। स्टुअर्ट बिन्नी और रवींद्र जडेजा को किस्मत और धोनी का सहारा भी मिला, लेकिन दोनों ही अब तक खुद को पूरी तरह साबित करने में नाकाम रहे। जडेजा ने 16 टेस्ट में मात्र 473 रन बनाए हैं तो उनके खाते में 68 विकेट है। जडेजा एक बल्लेबाज से एक बेहतर गेंदबाज हैं।

बहरहाल, ऋषि धवन, हार्दिक पंड्या और गुरकीरत सिंह मान टीम इंडिया के नए चेहरे हैं, जिन्होंने ऑलराउंडर बनने की क्षमता को दर्शाया है।
घरेलू क्रिकेट में इन तीनों का प्रदर्शन बेहतरीन रहा। गुरकीरत ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 22 मैचों में 1469 रन बनाने के अलावा 32 विकेट झटके। ऋषि धवन ने 51 प्रथम श्रेणी मैचों में 2165 रन बनाए और 220 शिकार किए। वहीं हार्दिक ने सिर्फ 13 प्रथम श्रेणी मैचों में 594 रन बनाते हुए 17 विकेट लिए।

गुरकीरत और धवन को वन-डे सीरीज में खेलने का मौका मिला, लेकिन दोनों ही अपना प्रभाव नहीं छोड़ सके। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वन-डे सीरीज में गुरकीरत 3 मैचों में मात्र 13 रन बनाए, जबकि ऑलराउंडर का तमगा लेने के बावजूद कोई विकेट नहीं लिया। धवन ने 3 मैचों में बल्‍ले से 12 रन बनाए और सिर्फ 1 एक विकेट लिया। एक तरफ तो हम यह कह सकते हैं, कि सीरीज में इन दोनों के हाथ में नाकामी लगी। मगर इन्हें चूका हुआ मानना बड़ी गलती हो सकती है, क्यूंकि अभी यह युवा हैं और आगे कई मौके के हकदार हैं।

भारतीय टीम को अभी भी अपने विशेषज्ञ ऑलराउंडर के लिए इंतजार करना पड़ेगा। ऋषि धवन, गुरकीरत, पांड्या या कोई और ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। मगर इतना जरूर कहा जा सकता है, कि ये इंतजार काफी लंबा हो चुका है। हार्दिक पंड्या ने पहले टी-20 में जिस तरह गेंदबाजी की, उससे भारतीय टीम को कपिल देव के उत्तराधिकार का नया विकल्प जरूर मिलने की उम्मीद जगी है।

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