CWC19- बांग्लादेश टीम पर बोझ बने हुए हैं कप्तान मशरफे मुर्तजा? 1

किसी भी टीम के लिए एक कप्तान सबसे बड़ा प्रेरणा स्त्रोत माना जाता है। किसी टीम की कमान संभालने वाला खिलाड़ी आगे बढ़कर टीम खुद अपने प्रदर्शन से टीम के खिलाड़ियों को अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है लेकिन जब कप्तान ही फिसड्डी हो तो भला वो टीम का कैसे भला कर सकता है।

एक कप्तान ऐसा भी, जिसका प्रदर्शन रहा सबसे फिसड्डी

इसी तरह से इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड की मेजबानी में खेले जा रहे आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2019 में 10 टीमें अपने कप्तानों के साथ इस टूर्नामेंट में बेहतर करने के इरादें से उतरी।

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वैसे तो अपनी-अपनी टीमों के लिए सभी कप्तानों का योगदान जबरदस्त और सराहनीय रहा लेकिन एक कप्तान ऐसा भी था जो अपनी टीम के लिए हर मैच के साथ बोझ ही बनता जा रहा था जिसके प्रदर्शन पर विश्व कप में उनके सफर के खत्म होते होते सवालों के घेरे में ला खड़ा किया।

मुशरफे मुर्तजा के लिए ये विश्व कप रहा निराशाजनक

यहां हम बात कर रहे हां बांग्लादेश के कप्तान मुशरफे मुर्तजा की। बिना किसी शक के बांग्लादेश क्रिकेट इतिहास में मुशरफे मुर्जता सबसे बेहतरीन गेंदबाजों में से एक रहे हैं। मुर्तजा ने अपने 18 साल के क्रिकेट करियर में खास सफलता हासिल की है।

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लेकिन इस विश्व कप के लिए मुशरफे मुर्तजा के शरीर को देखकर तो बिल्कुल ही नहीं लग रहा था कि वो विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में खेलने के लिए अब अपनी उम्र के इस पड़ाव पर फिट हैं।

टीम के स्ट्राइकर गेंदबाज, लेकिन 8 मैचों में 1 विकेट किया अपने नाम

बांग्लादेश की टीम का इस विश्व कप में बढ़िया प्रदर्शन रहा। हालांकि वो सेमीफाइनल में तो जगह नहीं बना सके, लेकिन उन्होंने दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज जैसी दो टीमों को मात दी। और इन दोनों टीमों से तालिका में आगे भी रहे।

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लेकिन टीम के कप्तान मुशरफे मुर्तजा पूरे विश्व कप में जूझते नजर आए। मुशरफे मुर्तजा इस टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में से एक हैं तो साथ ही स्ट्राइक गेंदबाज ….लेकिन बांग्लादेश का ये स्ट्राइक गेंदबाज पूरे टूर्नामेंट में विकेट की आस में ही लगा रहा।

क्या कप्तानी ने उनके लिए ऐसे प्रदर्शन के बाद भी निकाल दिया पूरा विश्व कप

प्रदर्शन के लिहाज से बात करें तो मुशरफे मुर्तजा ने इस विश्व कप में 8 मैच खेले जिसमें वो केवल 1 विकेट ही ले सके तो वहीं बांग्लादेशी कैप्टन एक या दो मैच को छोड़कर किसी भी मैच में अपने कोटे के 10 ओवर तक नहीं डाल सके। ऐसे में एक कप्तान ही मैदान में संघर्ष कर रहा हो तो वो अपनी टीम के लिए कैसे प्रेरणा बन सकता है।

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वैसे बेशक मुशरफे मुर्तजा बहुत बड़े योद्धा हैं। क्योंकि उन्होंने अपने पेशन कहे जाने वाले क्रिकेट खेल के लिए घुटनों के 6 ऑपरेशन करवाने के बाद भी मैदान में लड़ रहे हैं लेकिन 36 साल के होने वाले मुर्तजा को जब ये अहसास हो चुका है कि अब क्रिकेट उनके बस की नहीं है तो उन्हें इस विश्व कप में उतरने की जरूरत नहीं थी।

कप्तानी के पद ने टीम पर बोझ बनने के बाद भी बचाए रखी जगह

मुर्तजा के करियर की बात करें तो उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है। मुर्तजा ने अपने वनडे करियर में 217 मैच खेलने में कामयाबी हासिल की है जिसमें उन्होंने 32.92 की औसत से 266 विकेट हासिल किए हैं।

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लेकिन विश्व कप में ऐसे प्रदर्शन से तो टीम में जगह बनने पर ही संस्पेंस बना रहता है तो आखिर वो सभी मैच खेलने में कामयाब कैसे रहे? इसका सीधा सा जवाब है वो टीम के कप्तान थे। यानि कप्तानी के पद ने उनके लिए पूरा विश्व कप निकाल दिया । क्योंकि मुर्तजा टीम के लिए भार बनने से ज्यादा कुछ भी नहीं कर सके।

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