यो-यो टेस्ट पर सपोर्ट में बोले सौरव गांगुली

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बीसीसीआई प्रेसिडेंट सौरव गांगुली ने यो-यो टेस्ट पर दी अपनी राय 

बीसीसीआई प्रेसिडेंट सौरव गांगुली ने यो-यो टेस्ट पर दी अपनी राय

ऑस्ट्रेलिया. इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसी टीमों में यो-यो टेस्ट के जरिए खिलाड़ियों की फिटनेस का आंकलन किया जाता है. फिटनेस फ्रीक विराट कोहली ने कप्तान बनने के बाद कोच रवि शास्त्री के साथ मिलकर यो-यो टेस्ट को टीम इंडिया में लागू कर दिया था, इसी का नतीजा है कि आज टीम इंडिया के खिलाड़ियों का फिटनेस लेवल इतना अच्छा है.

सौरव गांगुली ने यो-यो टेस्ट पर दी प्रतिक्रिया

यो यो टेस्ट

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई प्रेसिडेंट सौरव गांगुली से हिंदुस्तान टाइम्स ने यो-यो टेस्ट के संदर्भ में पूछा, तो गांगुली ने कहा,

हर टीम मैनेजमेंट को अपने फैसले लेने की आजादी होनी चाहिए. अगर विराट कोहली, रवि शास्त्री और ट्रेनर्स को लगता है कि ये सही तरीका है तो वह ये कर सकते हैं. हम हर वक्त उनके फैसलों पर अंगुली नहीं उठानी चाहिए.

यदि टीम इंडिया के कप्तान और ट्रेनर्स फिटनेस स्तर के लिए इसकी मांग करते हैं,तो उसे ऐसे ही रहने दें. यदि आप इसे सीनियर टीम में शामिल करना चाहते हैं, आप इसे तब कर सकते हैं जब आप युवा हो, ये फिटनेस को आसान बनाता है.

सीनियर खिलाड़ियों ने की थी यो-यो टेस्ट की आलोचना

यो यो टेस्ट

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान बनने के बाद विराट कोहली ने टीम के फिटनेस लेवल को काफी बढ़ाया है. मौजूदा वक्त में टीम का लगभग हर खिलाड़ी फिट ही है. 2016-17 के बाद से, कोहली ने मुख्य कोच रवि शास्त्री के साथ यो-यो टेस्ट का समर्थन किया और टीम में शामिल होने से पहले योयो टेस्ट को पास करने का रूल बनाया.

टीम मैनेजमेंट द्वारा लिए इस फैसले पर कई पूर्व क्रिकेटरों ने आलोचना की थी. पिछले दिनों यो-यो टेस्ट में खराब परिणाम के कारण कुछ अनुभवी खिलाड़ियों जैसे कि युवराज सिंह, अंबाती रायडू, मोहम्मद शमी जैसे अच्छे खिलाड़ियों को भी टीम से बाहर का रास्ता दिखाया गया था. आपको बता दें, संन्यास के बाद कई बार युवराज सिंह मुखर होते हुए इस फिटनेस टेस्ट का मजाक उड़ाया है.

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