युवराज सिंह ने रैना कों पहले ही दुलीप ट्राफी में दिया मात, लेकिन फिर भी रैना उत्साहित

sagar mhatre / 27 August 2016

भारत में पहली बार प्रथम श्रेणी क्रिकेट में गुलाबी गेंद से डे नाइट टेस्ट मैच खेला गया. ये मैच दुलीप ट्रॉफी में इंडिया रेड और इंडिया ग्रीन के बीच खेला गया. इंडिया रेड के कप्तान युवराज सिंह और इंडिया ग्रीन के कप्तान सुरेश रैना ने गुलाबी गेंद के प्रयोग को सफल कहा हैं, और कहा, कि अगर हम लगातार गुलाबी गेंद से खेलते रहे, तो सभी कों  इसकी आदत हो जायेगी.

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युवराज सिंह की कप्तानी वाली इंडिया रेड ने दुलीप ट्रॉफी के पहले मैच में इंडिया ग्रीन को हराया. इस जीत के बाद युवराज सिंह ने कहा, “गुलाबी गेंद पुरानी नहीं होती, और इससे खेलने में एक अलग ही मजा हैं.”

युवराज सिंह ने कहा, “SG गेंद से ज्यादा स्विंग गुलाबी गेंद करती हैं, लेकिन गुलाबी गेंद बल्ले पर काफी अच्छे से आती हैं. गुलाबी गेंद पुरानी नहीं होती य सबसे अहम बात हैं.”

इंडिया ग्रीन के कप्तान सुरेश रैना ने कहा, कि “गुलाबी गेंद से डे नाइट टेस्ट खेलने में बड़ा ही मजा आया. गुलाबी गेंद से हम जितना खेलते जाएंगे, उससे हम हल्का महसूस करेंगे.”

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दुलीप ट्रॉफी के इस मैच पर युवराज सिंह ने कहा, कि “पहले दिन गेंद काफी ज्यादा स्विंग हो रहीं थी, और हमारी टीम 161 रनों पर अॉल आउट हो गयी. लेकिन मुझे ये उम्मीद थी, कि हमारे गेंदबाज भी उनकी टीम को जल्दी आउट करेंगे, और नाथु सिंह ने कमाल की गेंदबाजी करते हुए 6 विकेट लिए, और हमने उनकी पहली पारी को 151 रनों पर अॉल आउट किया.”

युवराज सिंह ने कहा, “दुसरी पारी में अभिनव मुकुंद और सुदीप चैटर्जी ने कमाल की पारियां खेली, और हम उन दोनों के शतक के बदौलत जीत के नजदीक पहुंच गये थे.”

इस मैच में दोनों पारियों में धमाकेदार पारियां खेलने वाले अभिनव मुकुंद मैन अॉफ द मैच बने, और उन्होंने कहा कि, “मैनें इस मैच से पहले मेरे घर पर नाइट में अभ्यास किया था, जिसका लाभ मुझे मिला. पहले दिन पिच पर काफी नमी थी, उस वजह से बल्लेबाजी करना काफी मुश्किल था. लेकिन मैनें अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाया.”

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अभिनव मुकुंद ने कहा कि, “मुझे अब पुरी उम्मीद हैं, कि मैं इस पुरे सीजन ऐसा ही खेलता रहूं, और भारतीय टीम में अपनी जगह बनाने में सफलता हासिल करू.”

अभिनव मुकुंद भारत के लिए 2011 में कुछ टेस्ट मैच खेल चुके हैं, जब इंग्लैंड और वेस्टइंडीज दौरे पर अभिनव मुकुंद गये थे. लेकिन उसके बाद से उन्हें कभी भी मौका नहीं मिला, और अब फिर से वे अपनी जगह बनाना चाहते हैं.

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