फ़ॉर्मूला1: लुइस हैमिलटन के रूस ग्रांप्री जीतते ही रूस ग्रांप्री सवालों के घेरे में

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फ़ॉर्मूला1: आख़िर क्यों सवालों के घेरे में है रूस ग्रांप्री 2018 

फ़ॉर्मूला1: आख़िर क्यों सवालों के घेरे में है रूस ग्रांप्री 2018

साल की केवल 5 रेस बाकी हैं। फ़ॉर्मूला1 रूस ग्रांप्री में लुइस हैमिलटन के जीतने के साथ ही सेबेस्टियन वेटल की वर्ल्ड ड्राईवर चैंपियनशिप जीतने की संभावनाएं लगभग ख़त्म हो चुकी हैं। लेकिन लुइस हैमिलटन के सोची ऑटोड्रोम सर्किट पर रेस जीतते ही एक ऐसा रिकॉर्ड मर्सेडीज़ के नाम जुड़ गया। कम से कम एक दशक तक यह रिकॉर्ड मर्सेडीज़ के नाम ही रहने वाला है।

इससे पहले 2019 के लिए फ़ॉर्मूला1 मार्केट में हुई उठा-पटक, लगभग ख़त्म हो चली है। रेस पॉइंट फ़ोर्स इंडिया और विलियम्स फ़ॉर्मूला1 टीम ही बाकी हैं, जिन्होंने अभी तक किसी ड्राईवर को अपने साथ नहीं जोड़ा है।

मर्सेडीज़ के नाम सौ प्रतिशत रिकॉर्ड

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मर्सेडीज़ के वेल्टरी बोट्टास ने पोल पोजीशन से शुरुआत की थी। उनकी शुरुआत भी ख़ासी अच्छी रही, लेकिन टीम के बॉस, टोटो वोल्फ़ का लुइस हैमिलटन को जिताने का दांव, उन्हीं के लिए दिक्कतें पैदा कर रहा है। इसीलिए उन्हें आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है।

लेकिन जो भी हो मर्सेडीज़ के निकटतम प्रतिद्वंद्वी, फ़ेरारी के सेबेस्टियन वेटल, पूरी रेस में एक पल के लिए भी लीड नहीं ले सके। इसी के साथ मर्सेडीज़ ने न केवल रूस में लगातार पांचवीं रेस जीती। बता दें कि मर्सेडीज़, इस ट्रैक पर कभी भी रेस हारी नहीं है। इसीलिए सोची ऑटोड्रोम, इस सर्किट पर मर्सेडीज़ का जीत रिकॉर्ड, सौ प्रतिशत हो चला है।

पोडियम पर नहीं मना जश्न

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रेस ख़त्म होने के बाद, पोडियम सेलीब्रेशन भी, मर्सेडीज़ की रणनीतियों पर कई सवाल खड़े कर चला है। वेल्टरी बोट्टास के माथे पर लकीरें साफ़ देखी जा सकती थीं।

ऐसा हो भी क्यों न, जब उन्हें पूरे वीकेंड, अच्छी पेस मिल रही थी। तो आख़िर क्यों उन्हें साल की पहली रेस जीतने से वंचित रखा गया?

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