भारतीय आइस हाकी टीम को पैसे की जरूरत, मांग रही है लोगो से मदद

जैसा की हम सभी जानते है, कि हाकी की पहले हमारे देश में क्या महत्व था, लेकिन अब हमारा देश पूरी तरह से क्रिकेट प्रधान देश हो गया है, लोगो को क्रिकेट के अलावा दूसरा कोई खेल नहीं देखना पसंद है, और यही कारण है, कि बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) आज दुनिया का सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड है.

लेकिन अगर हम हाकी की बात करे तो, हम भारतीय आइस हाकी टीम द्वारा अभी हाल ही में की गयी आनलाईन मदद की रिक्वेस्ट से हम जान सकते है, कि भारत में हाकी की क्या दशा है, वास्तव में भारतीय आइस हाकी टीम एक टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिये फंड इकठठा कर रही है. उसके लिये उन्होंने इंटरनेट के माध्यम से आनलाईन अपील की है.

वास्तव में भारतीय आइस हाकी टीम को 18 अप्रैल को कुवैत में होने वाले इंटरनैशनल आइस हॉकी फेडरेशन चैलेंज कप एशिया डिविजन-1 में हिस्सा लेना है, जिसके लिये टीम के प्रत्येक खिलाड़ी ने 20-20 हजार रूपये का योगदान दिया है, फिर भी टीम को अभी भी 20 लाख रूपये की आवश्यकता है, इसिलिये टीम ने इंटरनेट के माध्यम से सभी लोगो से 100 रूपये से लेकर 1 लाख रूपये तक का योगदान देने के लिये आनलाइन गुहार लगाई है.

आइस हॉकी असोसिएशन ऑफ इंडिया (IHAI) ने फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से लोगो से मदद करने की अपील की है, सूत्रों के अनुसार IHAI ने एक महीने पहले ट्विटर के माध्यम से लोगो से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन फिर भी अभी तक IHAI को पैसे नहीं मिल पाये है.

IHAI ने ट्विटर पर लिखा  है, कि-

“आइस हॉकी जैसे खेलों को आगे बढ़ाना बहुत मुश्किल है जबकि सारे स्पॉन्सर बजट क्रिकेट को मिल जाते हैं, हमारे पास एक नैशनल टीम है और हम पैसे मांग रहे हैं.”

आइस हॉकी एक महंगा खेल है, और इसमें प्रत्येक खिलाड़ी के उपकरणों का खर्चा 25 से 50 हजार रुपये तक आता है, इस टीम के प्रत्येक सदस्य ने अपने उपकरणों का खर्चा खुद ही दिया है.

कुमार कहते हैं,-

“सरकार ओलिंपिक और एशियन गेम्स खेलों के लिए पैसे देती है, जबकि आइस हॉकी के लिए हमे सरकारी मदद पाने के लिए मेडल जीतकर लाना होता है.”

उन्होंने आगेकहा:

“अगर हम मेडल नहीं जीतते हैं, तो हमे पैसा नहीं मिलता, लेकिन अगर हमें पैसे नहीं मिलेंगे, तो हम मेडल नहीं जीत पाएंगे, इसलिए यह काफी मुश्किल स्थिति है.”

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