प्रो कबड्डी ने बदल दी निजामपुर के ‘निजाम’ रोहित की जिंदगी

ians / 08 July 2016

पटना, 8 जुलाई (आईएएनएस)| दिल्ली का निजामपुर गांव कबड्डी का गढ़ माना जाता है। कबड्डी यहां के लोगों की जिंदगी में रची बसी है। यही से ताल्लुक रखते हैं स्टार स्पोर्ट्स प्रो कबड्डी लीग की बेंगलुरू बुल्स टीम के रेडर रोहित कुमार और पुनेरी पल्टन के लिए खेलने वाले उनके चचेरे भाई मंजीत चिल्लर। रोहित कहते हैं कि कबड्डी उन्हें गांव से उपहार के तौर पर मिली है।

लीग के तीसरे सीजन की चैम्पियन पटना पाइरेट्स टीम का हिस्सा रहे रोहित ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि वह स्टार स्पोर्ट्स और भारतीय कबड्डी महासंघ के शुक्रगुजार हैं क्योंकि इस लाग ने उनकी और उनके जैसे कई खिलाड़ियों की जिंदगी बदल दी है। रोहित को तीसरे सीजन का मोस्ट वैल्यूबल प्लेअर चुना गया था।

इस साल मार्च में पश्चिमी दिल्ली के नांगलोई में विवाह रचाने वाले रोहित ने कहा, “लीग से पहले मेरी जिंदगी सामान्य थी। मैं सर्विसेज और भारत के लिए खेलने के बारे में ही सोचता था लेकिन प्रो कबड्डी के बाद सबकुछ बदल गया। अब हमें लोग पहचानने लगे हैं। पैसे भी मिलने लगे हैं। अब जिंदगी व्यस्त हो गई है लेकिन इसमें भी अपना मजा है। प्रो कबड्डी ने जो मुकाम दिया है, वह हर खिलाड़ी की चाह होती है। हमें लीग से अब तक जो कुछ मिला है, उससे बहुत खुश हूं।”

रोहित भारतीय नौ सेना में एजीपीओ (हेड कांस्टेबल) पद पर तैनात हैं और इस साल सैफ खेलों में हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। भारत ने सैफ खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। रोहित ने बताया कि उनके पिता भी कबड्डी खेलते थे। वह नेशनल तक खेले और इन दिनों दिल्ली पुलिस मे ंतैनात हैं।

रोहित ने कहा, “2009 में मेरी नौकरी लगी। उससे पहले गांव में ही खेलता था और फिर स्कूल नेशनल और फिर सीनियर नेशनल के लिए प्रयास किया। साल 2011 में मैंने बेंगलूरू साई में नेशनल कैम्प में हिस्सा लिया। अगले साल जब प्रो कबड्डी शुरू हुआ तब यू मुम्बा ने मुझे आक्श्न में 7 लाख 10 हजार रुपये में खरीदा लेकिन सर्विसेज ने लीग में ख्रेलने की अनुमति नहीं दी। दूसरे सीजन में भी मैं नहीं खेल सका लेकिन तीसरे सीजन में मैं लॉटरी सिस्टम के तहत पटना पहुंचा और फिर की पीछे मुड़कर नहीं देखा।”

स्टार स्पोर्ट्स प्रो कबड्डी को एक साल में दो बार कराने की योजना के बार में पूछे जाने पर रोहित ने कहा कि यह एक अच्छी सोच है। खिलाड़ी अगर लगातार खेलते रहेंगे तो फिट रहेंगे और फिर उन्हें आमदनी भी होगी। इससे देश को भी फायदा होगा।

रोहित ने कहा, “साल में दो लीग का कान्सेप्ट अच्छा है। हम खिलाड़ी हैं और हमारा काम खेलना है। इस लीग ने हमें पहचान दी है। मैं खिलाड़ी हूं और मेरा काम खेलना है। मुझे खुशी है कि आज पटना और बेंगलुरू में लोग पहचानते हैं और पटना से मेरा लगाव तो है ही क्योंकि पिछले साल मैं इस टीम सबसे अच्छा खिलाड़ी था। मुझे लोग पसंद करते हैं और मैं भी पटना वालों को पसंद करता हूं।”

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