एशियन गेम्स 2018 में भारतीय बैडमिंटन खिलाडियों से पदक की उम्मीद कम

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एशियन गेम्स 2018 में भारतीय शटलरों से पदक की उम्मीद है बहुत कम, ये रहा कारण 

एशियन गेम्स 2018 में  भारतीय शटलरों से पदक की उम्मीद है बहुत कम, ये रहा कारण

एशियन गेम्स 2018, क्या आप तैयार हैं 10000 खिलाडियों को एक-साथ देखने के लिए। उन दस हज़ार खिलाडियों में से भारतीय खिलाडियों का जत्था भी काफ़ी बड़ा है। इस बड़े से जत्थे में से भारतीय शटलरों से उम्मीद होगी कि वो भारत को एशियन गेम्स में पहला गोल्ड मेडल जितायें।

बता दें कि भारत के नाम बैडमिंटन में एक ऐसा अनचाहा रिकॉर्ड, प्रकाश पादुकोण और सैय्यद मोदी जैसे खिलाड़ी भी इस बदसूरत से दिखने वाले रिकॉर्ड को अंतिम रूप नहीं दे पाए। लेकिन उन्होंने भारतीय बैडमिंटन के लिए जो किया, उसे कभी नहीं भुलाया जा सकेगा।

किदाम्बी श्रीकांत, पीवी सिन्धु, साइना नेहवाल जैसे खिलाडियों से उम्मीद होगी कि वो भारत को एशियन गेम्स के इतिहास में पहला स्वर्ण पदक जितायें।

पीले तमगे की केवल उम्मीद

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बीते कुछ वर्षों में बैडमिंटन पर से चीन का राजत्व खत्म तो हुआ। लेकिन फिर भी 2014 एशियन गेम्स में भारत की झोली में स्वर्ण पदक तो दूर, रजत पदक तक नहीं आया। भारत के नाम, एशियन गेम्स में कुल 8 बैडमिंटन पदक हैं, आठ के आठ कांस्य हैं।

यानी एशियन गेम्स के इतने लम्बे इतिहास में भारत का कोई भी खिलाड़ी, पदक के रंग को बदलने में सफ़ल नहीं हो पाया है।

किदाम्बी श्रीकांत और पीवी सिन्धु से उम्मीद

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एशियन गेम्स 2018 में किदाम्बी श्रीकांत और पीवी सिन्धु की अगुवाई में भारतीय शटलरों से उम्मीद होगी कि वो कम से कम भारत को पहला रजत पदक जीतने की ख़ुशी प्रदान करें।

रजत पदक इसलिए, क्योंकि हाल ही में हुई बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारतीय शटलरों को मुंह की खानी पड़ी थी। समीर वर्मा, जो एक दिन पहले ही रूस ओपन 2018 का ख़िताब जीत, वर्ल्ड चैंपियनशिप की पदकीय दौड़ में शामिल हुए थे। उन्हें भी चीन के दिग्गज, लिन डान के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था।

ख़राब फ़ॉर्म से जूझ रहे हैं भारतीय खिलाड़ी

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जिस तरह साइना, तकनीकी तौर पर भी और रणनैतिक तौर पर भी वर्ल्ड चैंपियनशिप में कमज़ोर नज़र आयीं। इसलिए उनसे पदक की उम्मीद कम ही लगाई जा रही हैं।

वहीँ किदाम्बी श्रीकांत, क्वार्टर-फाइनल में भी जगह नहीं बना पाए थे। एक महीने पहले श्रीकांत दुनिया के तीसरे नंबर के खिलाड़ी हुआ करते थे। लेकिन अब वो आठवें स्थान पर खिसक गए हैं।

यानी स्वर्ण या रजत पदक तो दूर, इस बार कांस्य पदक की उम्मीदें कमज़ोर पडती दिखाई पड़ रही हैं।

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