बैडमिंटन: आख़िर क्यों भारतीय खिलाड़ी, बड़े टूर्नामेंट में लगातार हो रहे हैं विफ़ल

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बैडमिंटन: जापान ओपन में भारतीय सफ़र ख़त्म 

बैडमिंटन: जापान ओपन में भारतीय सफ़र ख़त्म

बैडमिंटन जापान ओपन के सेमीफाइनल में भी कोई भारतीय शटलर जगह नहीं बना पाया है। किदाम्बी श्रीकांत के रूप में भारत की आख़िरी ख़िताबी उम्मीदें बची हुई थीं। लेकिन क्वार्टर फाइनल मुक़ाबले में उन्हें भी हार का सामना कर, टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा है।

आख़िर बड़े टूर्नामेंट में भारतीय शटलरों का प्रदर्शन इस तरह जवाब क्यों दे जाता है? विक्टर एक्सेल्सन, लिन डान, ताई जू यिंग और चेन यूफ़ी जैसे खिलाड़ियों के खिलाफ़ भारतीय शटलर, घुटने क्यों टेक देते हैं।

भारतीयों के पास नहीं है बॉडी स्मैश का जवाब

बैडमिंटन: जापान ओपन में भारतीय सफ़र ख़त्म 1

आमतौर पर, किदाम्बी श्रीकांत को कोर्ट पर आक्रामक और पीवी सिन्धु को डिफेंसिव खेल खेलते हुए देखा जाता है। जब दुनिया के दिग्गजों से इनकी तुलना की जाए, तो भारतीयों से ये दिग्गज, प्रदर्शन के मामले में कोसों दूर खड़े नज़र आते हैं। बॉडी स्मैश जब पड़ता है, तो ज्यादातर मौकों पर भारतीय शटलरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

खेल में हालाँकि हर कोई खिलाड़ी, किसी न किसी क्षेत्र में महारथ रखता है। लेकिन एक खिलाड़ी की दूसरे से तुलना करना, आज के दौर में आम बात है। विक्टर एक्सेल्सन क्यों, विश्व के नंबर-1 शटलर बने हुए हैं? उनके पास न केवल हर तरह के स्मैश का जवाब है, बल्कि उनके नेट पॉइंट्स भी लाजवाब हैं।

नेट पॉइंट्स में भी फ़ेल

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पहले का दौर वह था जब नेट पॉइंट्स, नेट के करीब से ही शॉट खेलकर जीते जाते थे। लेकिन पिछले दशक में जिन खिलाड़ियों ने नेट पॉइंट्स का सही से प्रयोग किया, वही अब बैडमिंटन के टॉप खिलाड़ी बने हुए हैं।

पुरुष एकल खिलाड़ी, विक्टर एक्सेल्सन, केंटो मोमोटा, ली चोंग वेई के पास गज़ब की नेट स्किल्स हैं। ये खिलाड़ी, ऐसे दर्शाते हैं जैसे कोर्ट के बाहरी हिस्से से स्मैश लगाने वाले हों। लेकिन बल्ले की गति को धीमा कर ये उसे सीधे नेट के पास ही गिराने में सक्षम हैं।

बात यह नहीं कि भारतीयों को किसी शॉट की समझ नहीं। लेकिन ख़ुद को वक़्त के साथ बदलते रहने में ही समझदारी है। मुझे आज भी याद है, 2017 इंडियन ओपन में खेला गया, एच एस प्रणय और सौरभ वर्मा के बीच, पहले राउंड का मुक़ाबला। जब सौरभ ने गज़ब की स्किल्स का प्रदर्शन करते हुए वह मैच जीता था।

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