Good News For Shikhar Dhawan: टीम इंडिया के पूर्व ओपनर शिखर धवन की जिंदगी में एक बार फिर से खुशियां लौट आई हैं। शिखर ने हाल ही में अपनी गर्लफ्रेंड सोफी शाइन के साथ सात फेरे लिए और उन्हें अपना जीवनसाथी बना लिया। वहीं, बाएं हाथ के पूर्व ओपनर को एक और गुड न्यूज मिली है, जो करोड़ों की धनराशि से जुड़ी है।
दरअसल, दिल्ली की पारिवारिक अदालत ने शिखर धवन (Shikhar Dhawan) की एक्स वाइफ आएशा मुखर्जी को ऑस्ट्रेलिया में संपत्ति समझौते के तहत प्राप्त 5.7 करोड़ रुपये (894,397 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर) लौटाने का निर्देश दिया है, जिसको लेकर काफी समय से केस चल रहा था लेकिन अब फैसला पूर्व भारतीय खिलाड़ी के पक्ष में आया है।
आएशा मुखर्जी को मिला संपत्ति समझौते के तहत प्राप्त राशि शिखर धवन (Shikhar Dhawan) को लौटाने का निर्देश

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रहने वाली आएशा मुखर्जी से शिखर धवन (Shikhar Dhawan) की शादी साल 2012 में हुई थी। दोनों के बीच आठ साल तक सब कुछ ठीक चला लेकिन फिर कुछ कारणों से इनके रिश्ते में दरार आ गई और फिर 2023 में इनका आधिकारिक रूप से तलाक हो गया। हालांकि, शिखर एक बहुत ही सफल क्रिकेटर थे और उनकी नेटवर्थ भी काफी अच्छा है। उन्होंने काफी प्रॉपर्टी भी खरीदी है। हालांकि, जब इनका तलाक हुआ तो शिखर को झटका लगा, क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट ने तलाक सेटलमेंट के दौरान संपत्ति समझौते के रूप में बाएं हाथ के खिलाड़ी को आएशा को 5.7 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया।
हालांकि, अब इस फैसले को पटियाला हाई कोर्ट ने गलत बताया है। शिखर धवन (Shikhar Dhawan) को महत्वपूर्ण राहत देते हुए, पटियाला हाउस फैमिली कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ऑस्ट्रेलियाई अदालत द्वारा पारित तलाक संबंधी संपत्ति सेटलमेंट अमान्य है। अदालत ने पाया कि विवाह भारत में पंजीकृत था और विदेशी अदालत को इस विवाद पर फैसला सुनाने का अधिकार नहीं था। अदालत ने यह भी कहा कि धवन इस मामले में ऑस्ट्रेलियाई अदालत द्वारा जारी किसी भी आदेश से बाध्य नहीं हैं।
न्यायाधीश देवेंद्र कुमार गर्ग ने संपत्ति निपटान से संबंधित सभी दस्तावेजों को अमान्य घोषित करते हुए कहा कि धवन ने धमकी, दबाव और धोखाधड़ी के तहत उन पर हस्ताक्षर किए थे। अदालत ने मुखर्जी को धवन द्वारा मुकदमा दायर करने की तारीख से राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करने का भी आदेश दिया। दिल्ली की अदालत ने मुखर्जी को फरवरी 2024 के ऑस्ट्रेलियाई अदालत के आदेशों को लागू करने से रोक दिया, जिसमें धवन की भारत में स्थित संपत्तियों और वित्त सहित दंपति की वैश्विक संपत्तियों का विभाजन किया गया था।
ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के कोर्ट ने शिखर धवन (Shikhar Dhawan) की कुल संपत्ति का 15 प्रतिशत हिस्सा आएशा मुखर्जी को दिया था। इसके तहत उन्होंने 7.46 करोड़ रुपये (1.17 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर) की संपत्ति अपने पास रखी और धवन से 15.95 करोड़ रुपये (2.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर) की अतिरिक्त संपत्ति और एक संपत्ति का हस्तांतरण प्राप्त किया। 2021 और 2024 के बीच, ऑस्ट्रेलियाई अदालत ने उनकी संपत्ति के बंटवारे के संबंध में कई आदेश पारित किए।
शिखर धवन (Shikhar Dhawan) ने दिल्ली कोर्ट में ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट के फैसले को किया था चैलेंज
शिखर धवन (Shikhar Dhawan) ने ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट के इन फैसलों को दिल्ली कोर्ट में चैलेंज किया और तर्क दिया कि ये भारतीय वैवाहिक कानून का उल्लंघन करते हैं। धवन ने दावा किया कि उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई अदालत के समक्ष हलफनामा प्रस्तुत किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि वे अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करते हैं और कोई भी अंतरिम समझौता दबाव में किया गया था। अपने बयान में धवन ने आरोप लगाया कि 2012 में शादी के तुरंत बाद, मुखर्जी ने धमकी दी कि अगर उन्होंने उनकी वित्तीय मांगों को पूरा नहीं किया, तो वह उनकी प्रतिष्ठा और क्रिकेट करियर को नुकसान पहुंचाने के लिए मनगढ़ंत और मानहानिकारक सामग्री फैला देंगी।
उन्होंने दावा किया कि उनके निजी पैसों से खरीदी गई संपत्तियों को दबाव में मुखर्जी के नाम पर संयुक्त रूप से या मुख्य रूप से पंजीकृत कराया गया था। अदालत को बताया गया कि एक मामले में, धवन द्वारा खरीदी गई संपत्ति में मुखर्जी को 99 प्रतिशत मालिक के रूप में दर्ज किया गया था। धवन ने यह भी बताया कि उन्होंने दबाव में एक संपत्ति ऑस्ट्रेलिया में खरीदी थी, जो उनकी एक्स वाइफ के नाम पर थी और बाद में 2019 में यह बेच दी गई लेकिन उससे प्राप्त राशि में उन्हें कुछ भी नहीं मिला था।
सबूतों की जांच करने के बाद, न्यायाधीश गर्ग ने माना कि शिखर धवन (Shikhar Dhawan) की ऑस्ट्रेलियाई कार्यवाही में भागीदारी को उसकी अधिकारिता के प्रति स्वैच्छिक समर्पण नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह कथित तौर पर भय और दबाव के तहत की गई थी। न्यायालय ने यह भी कहा कि कार्यवाही उस वैवाहिक कानून पर आधारित नहीं थी जिसके तहत पक्षों का विवाह हुआ था।