Gautam Gambhir ignore domestic cricket performer : घरेलू क्रिकेट का मौजूदा सीजन भारतीय क्रिकेट के भविष्य की झलक दिखा रहा है। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के बाद अब विजय हजारे ट्रॉफी में रन मशीनें खुलकर सामने आ रही हैं। मैदान पर लगातार शतक लग रहे हैं और कई बल्लेबाज़ इस सीजन में चार या उससे ज्यादा शतक जड़ चुके हैं।
इन्हीं नामों में सबसे चमकदार प्रदर्शन कर्नाटक के बाएं हाथ के बल्लेबाज़ देवदत्त पडिक्कल का रहा है, जिनकी निरंतरता ने उन्हें घरेलू क्रिकेट का सबसे भरोसेमंद नाम बना दिया है। इस शानदार प्रदर्शन के बावजूद भारतीय टीम के कोच गंभीर (Gautam Gambhir) ने उन्हें अभी तक ODI डेब्यू नहीं दिया।
विजय हजारे ट्रॉफी में रनों की बरसात

विजय हजारे ट्रॉफी के इस सीजन में कई दिग्गज और युवा बल्लेबाज़ों ने अपने बल्ले से कोहराम मचाया है। कुछ खिलाड़ियों ने शुरुआती मुकाबले में ही शतक जड़कर अपने इरादे साफ कर दिए, वहीं बिहार के युवा वैभव सूर्यवंशी जैसे नामों ने भी शतक लगाकर सबका ध्यान खींचा। इस भीड़ में जो बल्लेबाज़ सबसे अलग नजर आया, वह था कर्नाटक का बल्लेबाज़ देवदत्त पडिक्कल , जिसने लगभग हर मैच में विपक्षी गेंदबाज़ी को बेबस कर दिया।
पांच मैचों में चार शतक, चयनकर्ताओं को संदेश
कर्नाटक की ओर से खेलते हुए पडिक्कल ने इस सीजन के शुरुआती पांच मुकाबलों में चार शतक लगाकर असाधारण फॉर्म दिखाई। त्रिपुरा के खिलाफ 108 रन की पारी हो या झारखंड, केरल और पुडुचेरी के खिलाफ बड़े स्कोर—हर मैच में उनका बल्ला बोला। राजस्थान के खिलाफ छठे मुकाबले में भी वह शतक के बेहद करीब पहुंचे और 82 गेंदों पर 91 रन बनाकर आउट हुए। यह पारी भले शतक में न बदली हो, लेकिन इससे यह साफ हो गया कि उनका फॉर्म लगातार ऊंचाई पर है।
लिस्ट-ए क्रिकेट में ऐतिहासिक उपलब्धि
25 साल की उम्र में देवदत्त पडिक्कल ने लिस्ट-ए क्रिकेट में एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जो बहुत कम बल्लेबाज़ों को नसीब होता है। सिर्फ 38 पारियों में 13 शतक पूरा करना अपने आप में रिकॉर्ड जैसा है। लगभग 83 के औसत से 2600 से ज्यादा रन बनाना उनकी निरंतरता और तकनीकी मजबूती को दर्शाता है। 6 फीट 3 इंच लंबे इस बल्लेबाज़ ने भले ही अपेक्षाकृत देर से क्रिकेट शुरू किया हो, लेकिन आज वह लिस्ट-ए फॉर्मेट के सबसे खतरनाक ओपनरों में गिने जाते हैं।
कोच Gautam Gambhir ने नहीं दिया अभी तक ODI डेब्यू , लेकिन भविष्य का मजबूत दावेदार
हालांकि इतने शानदार घरेलू प्रदर्शन के बावजूद अभी तक उन्हें वनडे क्रिकेट में भारत के लिए डेब्यू का मौका नहीं मिला है। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में चयन न होना उनके लिए निराशाजनक जरूर रहा, लेकिन मौजूदा फॉर्म को देखते हुए यह साफ है कि वह लंबी रेस के घोड़े हैं। जिस तरह से वह लगातार बड़े स्कोर बना रहे हैं, उससे 2027 वनडे वर्ल्ड कप की टीम इंडिया के लिए उनका दावा बेहद मजबूत होता जा रहा है। घरेलू क्रिकेट में उनकी यह निरंतरता बताती है कि मौका मिलने पर वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा प्रभाव छोड़ सकते हैं।