Rinku Singh : भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते सितारे रिंकू सिंह (Rinku Singh) इन दिनों गहरे व्यक्तिगत दुख से गुजर रहे हैं। 27 फरवरी 2026 की सुबह उनके पिता खानचंद्र सिंह का स्टेज-4 लिवर कैंसर के कारण निधन हो गया। इस खबर ने खेल जगत और उनके प्रशंसकों को भावुक कर दिया। लेकिन अंतिम संस्कार के दौरान लिया गया एक फैसला सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गया।
करोड़ों की संपत्ति और अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले रिंकू सिंह (Rinku Singh) ने अपने पिता की अंतिम यात्रा के लिए किसी निजी या प्रीमियम व्यवस्था के बजाय स्थानीय सामाजिक संस्था ‘मानव उपकार’ की शव गाड़ी का इस्तेमाल किया, जिस पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
सादगी और जड़ों से जुड़ाव की तस्वीर
रिंकू सिंह (Rinku Singh) का जीवन संघर्ष और सादगी की मिसाल रहा है। उनके पिता अलीगढ़ में एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे और साधारण जीवन जीते थे। रिंकू ने भी कई बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उनकी सफलता के पीछे पिता की मेहनत और त्याग है। ऐसे में समर्थकों का मानना है कि मानव उपकार की गाड़ी का चुनाव उनके पारिवारिक संस्कार और जमीन से जुड़े स्वभाव को दर्शाता है।
स्थानीय स्तर पर यह संस्था अंतिम संस्कार की सेवाएं निस्वार्थ भाव से उपलब्ध कराने के लिए जानी जाती है। कई लोगों के अनुसार, दुख की घड़ी में दिखावे के बजाय सादगी को प्राथमिकता देना ही उनके परिवार के मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है।
आलोचकों के सवाल और सोशल मीडिया बहस
दूसरी ओर, कुछ लोगों ने इस फैसले पर सवाल भी उठाए। उनका तर्क है कि एक सफल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के नाते रिंकू सिंह के पास बेहतर निजी इंतजाम करने की क्षमता थी। लीग क्रिकेट और प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्ट्स से मिली आर्थिक मजबूती को देखते हुए कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे अनावश्यक किफायत बताया।
यह बहस तेजी से फैल गई और लोगों ने इसे सादगी बनाम संसाधनों के उपयोग के नजरिए से देखना शुरू कर दिया। हालांकि, कई लोगों ने आलोचनाओं को अनुचित बताते हुए कहा कि शोक के समय में ऐसे सवाल उठाना संवेदनहीनता है।
पिता-पुत्र का भावनात्मक रिश्ता
रिंकू सिंह (Rinku Singh) अपने पिता के बेहद करीब थे। हाल ही में उन्होंने उन्हें एक कावासाकी निंजा मोटरसाइकिल भी उपहार में दी थी, जो उनके रिश्ते की गहराई को दिखाती है। पिता की बिगड़ती तबीयत की खबर मिलते ही उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच से ही घर लौटने का फैसला किया था ताकि परिवार के साथ रह सकें। यह कदम बताता है कि उनके लिए पारिवारिक रिश्ते किसी भी पेशेवर उपलब्धि से ऊपर हैं।
ऐसे संवेदनशील समय में अंतिम संस्कार की व्यवस्था को लेकर उठे सवाल इस बात की याद दिलाते हैं कि किसी भी व्यक्ति का अपने प्रियजन को विदा करने का तरीका निजी और भावनात्मक निर्णय होता है, जिसे बाहरी नजरिए से परखना हमेशा उचित नहीं होता।
रिंकू सिंह के पास करोड़ों रुपए हैं, परिवार और ससुराल दोनों संपन्न हैं फिर अंतिम संस्कार के लिए इस गाड़ी से ले जाना, उचित नहीं लगता. #RinkuSinghFatherDemise pic.twitter.com/C0s57BQB4O
— Shivani Sahu (@askshivanisahu) February 27, 2026
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