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कभी मैगी खाकर पेट भरता था ये भारतीय खिलाड़ी, आज पहनता 53 करोड़ की घड़ी, चलाता रोल्स-रॉयस फैंटम

Indian cricketer

Success Story of Indian cricketer : भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे नाम हैं जिनकी सफलता की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती, और उन्हीं में से एक हैं हार्दिक पांड्या । आज वह दुनिया के सबसे चर्चित ऑलराउंडर्स में गिने जाते हैं, लेकिन यह मुकाम उन्हें आसानी से नहीं मिला। बचपन की आर्थिक तंगी, सीमित संसाधन और लगातार संघर्ष के बीच हार्दिक ने अपने सपनों को जिंदा रखा।

कभी दिन में दो वक्त सिर्फ मैगी खाकर गुजारा करने वाला यह खिलाड़ी आज करोड़ों की घड़ी पहनता है और लग्ज़री कारों का मालिक है। उनकी कहानी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है।

सूरत से वडोदरा तक का संघर्षपूर्ण सफर

हार्दिक पांड्या का जन्म 11 अक्टूबर 1993 को गुजरात के सूरत में हुआ था। उनके पिता हिमांशु पांड्या का छोटा सा कार फाइनेंस का बिजनेस था, लेकिन बेहतर भविष्य की तलाश में वह परिवार के साथ वडोदरा शिफ्ट हो गए। उस वक्त हार्दिक सिर्फ पांच साल के थे।

आर्थिक हालात मजबूत नहीं थे, फिर भी उनके पिता क्रिकेट के जबरदस्त शौकीन थे। वह हार्दिक और उनके भाई क्रुणाल को टीवी पर मैच दिखाते और कई बार स्टेडियम भी ले जाते थे। यहीं से दोनों भाइयों के मन में क्रिकेट के प्रति गहरा लगाव पैदा हुआ।

सीमित साधनों में क्रिकेट की ट्रेनिंग

हिमांशु पांड्या चाहते थे कि उनके बेटों को सही ट्रेनिंग मिले, इसलिए उन्होंने दोनों को वडोदरा की किरण मोरे क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलाया। परिवार किराये के घर में रहता था और एक सेकंड हैंड कार ही उनका सहारा थी, जिससे पिता बच्चों को ग्राउंड तक ले जाते थे।

एक दौर ऐसा भी था जब घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि हार्दिक ने बताया था कि वह सुबह और शाम सिर्फ मैगी खाकर पेट भरते थे। क्रिकेट किट खरीदने तक के पैसे नहीं थे, इसलिए कई बार मांगकर या क्रिकेट एसोसिएशन से किट लेकर खेलना पड़ा।

मुश्किल समय और पिता की बीमारी

साल 2010 में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब हार्दिक के पिता को एक ही रात में दो बार हार्ट अटैक आया। इसके बाद उन्हें काम छोड़ना पड़ा और घर की हालत और बिगड़ गई। उस समय जो भी थोड़ी बहुत कमाई होती थी, वह कार और ईएमआई में चली जाती थी।

शुरुआती दिनों में हार्दिक और क्रुणाल पास के गांवों में क्रिकेट मैच खेलने जाते थे, जहां हार्दिक को 400 और क्रुणाल को 500 रुपये मिलते थे। यही छोटी कमाई उनके सपनों को जिंदा रखने का सहारा बनी।

फर्श से अर्श तक का सफर

पढ़ाई में कमजोर होने के कारण हार्दिक नौवीं कक्षा में फेल हो गए और इसके बाद उन्होंने पूरी तरह क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित कर लिया। किरण मोरे ने उन्हें तीन साल तक मुफ्त ट्रेनिंग दी और लेग स्पिनर से फास्ट बॉलर बनने की सलाह दी, जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी।

आज हार्दिक पांड्या की गिनती करोड़पति खिलाड़ियों में होती है। मुंबई में उनका लग्ज़री घर, महंगी कारें और करोड़ों की कमाई इस बात का सबूत हैं कि संघर्ष अगर सच्चा हो तो सफलता जरूर कदम चूमती है।

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FAQS

हार्दिक पांड्या का जन्म कहाँ हुआ था?

हार्दिक पांड्या का जन्म गुजरात के सूरत शहर में हुआ था।

Vasu Jain

खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, एक कहानी है। मैं एक स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट हूँ, जो 2007 से क्रिकेट...

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