Ravichandran Ashwin on T20 World Cup 2026 : पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इंटरनेशनल क्रिकेट के मौजूदा ढांचे पर तीखा हमला बोलते हुए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल को कड़ी चेतावनी दी है। अपने यूट्यूब चैनल ‘ऐश की बात’ पर बातचीत के दौरान अश्विन ने कहा कि आईसीसी टूर्नामेंट्स की बढ़ती संख्या और टीमों के बीच गुणवत्ता में बढ़ते अंतर के कारण 2026 का पुरुष टी20 वर्ल्ड कप दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पाएगा। उनके मुताबिक, टूर्नामेंट के शुरुआती चरणों में होने वाले एकतरफा मुकाबले फैंस की दिलचस्पी को लगातार कम कर रहे हैं।
आईसीसी टूर्नामेंट्स की बढ़ती संख्या पर उठे सवाल

रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) ने सबसे पहले आईसीसी टूर्नामेंट्स की लगातार होती शेड्यूलिंग को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पहले वर्ल्ड कप चार साल में एक बार होता था, जिससे उसके आने का इंतजार और उत्सुकता अपने आप बनती थी।
फैंस महीनों पहले से तैयारी करते थे, मैचों का शेड्यूल देखते थे और हर मुकाबला खास महसूस होता था। अब हालात यह हैं कि लगभग हर साल कोई न कोई आईसीसी इवेंट देखने को मिल जाता है, जिससे वर्ल्ड कप की खास पहचान धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है।
शुरुआती दौर के एकतरफा मुकाबलों से घटता रोमांच
अश्विन की सबसे तीखी टिप्पणी टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों को लेकर रही। उन्होंने कहा कि भारत बनाम अमेरिका या भारत बनाम नामीबिया जैसे मुकाबले वर्ल्ड कप के स्तर को कमजोर बनाते हैं।
उनका मानना है कि जब मजबूत और उभरती टीमों के बीच अंतर बहुत ज्यादा हो, तो मुकाबला प्रतिस्पर्धी नहीं रह जाता। ऐसे मैच दर्शकों के लिए रोमांचक होने के बजाय बोझिल बन जाते हैं और फैंस धीरे-धीरे पूरे टूर्नामेंट से दूरी बनाने लगते हैं।
पुराने वर्ल्ड कप और आज के दौर का अंतर
रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) ने 1996, 1999 और 2003 के वर्ल्ड कप को याद करते हुए कहा कि उस समय यह टूर्नामेंट बेहद खास हुआ करता था। उन्होंने बताया कि स्कूल के दिनों में वर्ल्ड कप के कार्ड इकट्ठा करना और शेड्यूल प्रिंट करवाना आम बात थी।
उस दौर में भारत को पहले ही राउंड में इंग्लैंड और श्रीलंका जैसी मजबूत टीमों का सामना करना पड़ता था, जिससे शुरुआत से ही दबाव और रोमांच बना रहता था। अश्विन के अनुसार, आज के वर्ल्ड कप में वह उत्सुकता और भावनात्मक जुड़ाव नजर नहीं आता।
2026 टी20 वर्ल्ड कप को लेकर बढ़ती चिंताएं
2026 का पुरुष टी20 वर्ल्ड कप भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा, जिसमें 20 टीमें हिस्सा लेंगी। भारत डिफेंडिंग चैंपियन के तौर पर टूर्नामेंट में उतरेगा और शुरुआती मुकाबले में उसका सामना अमेरिका से होगा। अश्विन का मानना है कि इस तरह के मैच और ग्रुप संरचना वर्ल्ड कप की शुरुआत को कमजोर बना देते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि स्थापित और नई टीमों के बीच बढ़ता अंतर आईसीसी के लिए एक गंभीर चुनौती है, जिसे नजरअंदाज करना भविष्य में वर्ल्ड कप की लोकप्रियता के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
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