Ricky Ponting shocked by India T20 World Cup selection: भारतीय क्रिकेट में चयन को लेकर बहस कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मामला इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि बात भारत के सबसे प्रतिभाशाली बल्लेबाजों में से एक शुभमन गिल की हो रही है।
इंग्लैंड के खिलाफ रेड-बॉल सीरीज़ में रिकॉर्डतोड़ रन बनाने के बाद जब गिल एशिया कप के जरिए T20I टीम में लौटे और उन्हें उप-कप्तान भी बनाया गया, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि वह कुछ ही महीनों में T20 वर्ल्ड कप टीम से बाहर हो जाएंगे। इस फैसले ने न सिर्फ फैंस को बल्कि क्रिकेट के दिग्गजों को भी चौंका दिया है। शुभमन गिल के टी 20 वर्ल्ड कप में ड्रॉप होने को लेकर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग (Ricky Ponting) ने इस बात पर हैरानी जताई हैं।
Ricky Ponting की हैरानी और भारतीय बेंच स्ट्रेंथ

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग (Ricky Ponting) ने इस फैसले पर खुलकर हैरानी जताई। ICC रिव्यू में पोंटिंग ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं हुआ कि गिल जैसे खिलाड़ी को वर्ल्ड कप टीम से बाहर कर दिया गया है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि व्हाइट-बॉल क्रिकेट में गिल का हालिया फॉर्म उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, लेकिन इसके बावजूद उनका बाहर होना भारतीय क्रिकेट की गहराई को दर्शाता है। पोंटिंग के मुताबिक, जब गिल जैसा बल्लेबाज भी अंतिम 15 में जगह नहीं बना पा रहा, तो यह साफ है कि भारत के पास विकल्पों की कोई कमी नहीं है।
टेस्ट क्रिकेट का सुपरस्टार, T20 में संघर्ष
गिल का हालिया टेस्ट फॉर्म असाधारण रहा है। इंग्लैंड के खिलाफ एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में उन्होंने 754 रन बनाए और तकनीक, धैर्य व क्लास का बेहतरीन नमूना पेश किया। यही वजह थी कि उम्मीद की जा रही थी कि वह T20 फॉर्मेट में भी उसी आत्मविश्वास के साथ रन बनाएंगे।
लेकिन T20I में वापसी के बाद कहानी पूरी तरह अलग रही। 2025 में खेले गए 15 T20I मैचों में गिल एक भी अर्धशतक नहीं लगा पाए और उनका सर्वोच्च स्कोर 47 रन रहा। तेज़ स्ट्राइक रेट की मांग वाले इस फॉर्मेट में उनका गेम वह असर नहीं डाल सका, जिसकी टीम को ज़रूरत थी।
चयनकर्ताओं का नजरिया और अजीत अगरकर का बयान
भारतीय चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर ने इस फैसले को भावनाओं से नहीं, बल्कि कॉम्बिनेशन और टीम बैलेंस से जोड़कर देखा। अगरकर के अनुसार, गिल की काबिलियत पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन इस समय टीम को जिस तरह के खिलाड़ियों की जरूरत थी, उसमें संतुलन बैठाना जरूरी था।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ल्ड कप में भी गिल का बाहर रहना दुर्भाग्यपूर्ण था, लेकिन बड़े टूर्नामेंट में 15 खिलाड़ियों की सीमा के कारण किसी न किसी को बाहर होना ही पड़ता है।
सोशल मीडिया दबाव और फॉर्मेट मिक्स की कीमत
जब से गिल T20I टीम में उप-कप्तान के रूप में लौटे थे, सोशल मीडिया पर उनके प्रदर्शन को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगी थीं। खासकर तब, जब संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी लगातार रन बना रहे थे और उन्हें मौके नहीं मिल रहे थे। साउथ अफ्रीका के खिलाफ आखिरी सीरीज में गिल के स्कोर 4, 0 और 28 रहे, जबकि चोट और कोहरे के कारण वह अंतिम मैचों में नहीं खेल सके।
इन परिस्थितियों ने चयनकर्ताओं के फैसले को और कठिन बना दिया। आखिरकार, टेस्ट और वनडे में टीम की अगुवाई कर रहे गिल को T20 वर्ल्ड कप से बाहर रखने का फैसला लिया गया, जिसने भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या हर फॉर्मेट के लिए अलग विशेषज्ञ तैयार करना ही आगे का रास्ता है।
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