Sarfaraz Ahmed match fixing controversy : अंडर-19 वर्ल्ड कप अपने सबसे निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। नॉकआउट रेस में पहले ही ग्रुप 1 से ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 और अफगानिस्तान अंडर-19 सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं, जबकि ग्रुप 2 की तस्वीर अब भी साफ नहीं है।
इंग्लैंड अंडर-19 सुपर-6 तालिका में शीर्ष पर बना हुआ है, लेकिन भारत अंडर-19 और पाकिस्तान अंडर-19 के बीच चल रहा मुकाबला बाकी बचे एक सेमीफाइनल टिकट का फैसला करने वाला है। इसी अहम मैच के दौरान एक विवाद सामने आया, जिसने पूरे टूर्नामेंट की सुर्खियां बदल दीं।
मोबाइल फोन इस्तेमाल के बाद चर्चा में आए Sarfaraz Ahmed

भारत बनाम पाकिस्तान अंडर-19 मैच के दौरान उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब पाकिस्तान टीम के मेंटर सरफराज अहमद (Sarfaraz Ahmed) को ड्रेसिंग रूम के पास मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए देखा गया। मैच के बीच इस तरह की गतिविधि सामने आने के बाद सोशल मीडिया और क्रिकेट गलियारों में सवाल उठने लगे।
अंडर-19 टूर्नामेंट में, जहां युवा खिलाड़ियों की सुरक्षा और खेल की निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होती है, ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। यही वजह है कि यह मामला केवल नियम उल्लंघन तक सीमित न रहकर मैच फिक्सिंग जैसे गंभीर आरोपों से जोड़ा जाने लगा।
ICC के नियम और आर्टिकल 4 का हवाला
आईसीसी के एंटी-करप्शन कोड में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। ICC की हैंडबुक के अनुसार, एंटी-करप्शन कोड का आर्टिकल 4 (PMOA Restrictions) स्पष्ट करता है कि मैच के दिन किसी भी खिलाड़ी या सपोर्ट स्टाफ को ड्रेसिंग रूम और उससे जुड़े क्षेत्रों में मोबाइल फोन, लैपटॉप या किसी भी प्रकार के कम्युनिकेशन डिवाइस ले जाने या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है।
Article 4.1 के तहत यह प्रतिबंध उस समय से लागू हो जाता है, जब टीम का पहला खिलाड़ी PMOA क्षेत्र में प्रवेश करता है और दिन का खेल औपचारिक रूप से समाप्त होने तक जारी रहता है। इसका उद्देश्य बाहरी संपर्क, अंदरूनी जानकारी के दुरुपयोग और मैच फिक्सिंग की किसी भी आशंका को खत्म करना है।
किन्हें मिलती है छूट और संभावित कार्रवाई
ICC के नियमों में कुछ सीमित अपवाद जरूर दिए गए हैं, जो आर्टिकल 4.2 के तहत आते हैं। इसके अनुसार केवल टीम मैनेजर, मीडिया मैनेजर और सुरक्षा मैनेजर को विशेष शर्तों के साथ मोबाइल फोन रखने की अनुमति होती है।
टीम मैनेजर फोन का इस्तेमाल सिर्फ क्रिकेट संचालन या किसी खिलाड़ी के जरूरी व्यक्तिगत मामले में कर सकता है, जबकि मीडिया और सुरक्षा मैनेजर को डिवाइस साइलेंट मोड में रखना अनिवार्य होता है। मेंटर या कोचिंग स्टाफ के लिए ऐसी कोई सामान्य छूट नहीं है, जब तक कि ICC एंटी-करप्शन मैनेजर से पहले से अनुमति न ली गई हो।
ऐसे में अगर जांच में यह साबित होता है कि सरफराज अहमद (Sarfaraz Ahmed) ने बिना अनुमति मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया, तो इसे ICC एंटी-करप्शन कोड के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है। ICC इस पूरे मामले की जांच कर सकता है और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति और टीम के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है।
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