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डोप टेस्ट में पकड़े गए दो भारतीय, बोर्ड का कड़ा फैसला, 8 साल का लंबा बैन

dope test

Indian cricketer dope test positive : भारतीय खेल जगत में डोपिंग को लेकर एक बार फिर सख्त संदेश सामने आया है। क्रिकेट जैसे अपेक्षाकृत साफ माने जाने वाले खेल में डोप टेस्ट का मामला सामने आना न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि यह खेल प्रशासन की सतर्कता और सख्ती को भी दर्शाता है।

उत्तराखंड के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज राजन कुमार और तमिलनाडु की धाविका धनलक्ष्मी सेकर से जुड़े मामलों ने यह साफ कर दिया है कि नियमों के उल्लंघन पर अब किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जा रही।

राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) की ताज़ा कार्रवाई ने भारतीय खेलों में अनुशासन और पारदर्शिता की बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है।

राजन कुमार का मामला और क्रिकेट में बढ़ती चिंता

उत्तराखंड के 29 वर्षीय तेज गेंदबाज राजन कुमार का डोप टेस्ट (Dope Test) पॉजिटिव पाया जाना घरेलू क्रिकेट के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके नमूने में एनाबॉलिक स्टेरॉयड ड्रोस्टानोलोन और मेटेनोलोन के साथ क्लोमीफीन की पुष्टि हुई, जिसे आमतौर पर महिलाओं में बांझपन के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन पुरुषों में यह टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

नाडा ने इस गंभीर उल्लंघन के बाद उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। राजन कुमार ने अपना आखिरी मुकाबला 8 दिसंबर 2025 को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में दिल्ली के खिलाफ खेला था। घरेलू स्तर पर लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें आईपीएल में भी मौका मिल चुका था, लेकिन इस प्रकरण ने उनके करियर को अनिश्चितता के दौर में डाल दिया है।

क्रिकेट में दुर्लभ लेकिन गंभीर डोपिंग केस

क्रिकेट में डोपिंग के मामले भारत में बेहद कम देखने को मिलते हैं, इसी वजह से हर ऐसा मामला सुर्खियों में आ जाता है। 2019 में भारतीय ओपनर पृथ्वी शॉ को खांसी की दवा में प्रतिबंधित पदार्थ टर्बुटालाइन पाए जाने के कारण आठ महीने के निलंबन का सामना करना पड़ा था।

हालांकि उस मामले में यह साबित हुआ कि प्रतिबंधित पदार्थ अनजाने में लिया गया था। इसके विपरीत, राजन कुमार का मामला ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक से अधिक प्रतिबंधित स्टेरॉयड पाए गए हैं, जो प्रदर्शन बढ़ाने से सीधे तौर पर जुड़े माने जाते हैं।

Dope Test : अन्य खेलों में भी सामने आए कड़े उदाहरण

डोपिंग केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है। भारतीय खेलों के अन्य क्षेत्रों में भी हाल के वर्षों में कई बड़े मामले सामने आए हैं। मध्य प्रदेश की ऑलराउंडर अंशुला राव को 2020 में डोप टेस्ट में विफल होने पर चार साल का प्रतिबंध झेलना पड़ा था।

फुटबॉल में नोंगमैथेम रतनबाला देवी का नाम भी डोप टेस्ट (Dope Test) में फेल होने वाले दुर्लभ मामलों में शामिल हुआ, जिनके नमूने में स्टेरॉयड मेटांडिएनोन पाया गया था। इसके अलावा एथलेटिक्स, भारोत्तोलन और मुक्केबाजी जैसे खेलों में भी कई खिलाड़ी नाडा की निलंबन सूची में शामिल किए गए हैं।

धनलक्ष्मी सेकर पर 8 साल का कड़ा प्रतिबंध

तमिलनाडु की स्प्रिंटर धनलक्ष्मी सेकर का मामला इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि यह उनका दूसरा डोपिंग उल्लंघन है। सितंबर 2025 में उनके नमूने में एनाबॉलिक स्टेरॉयड ड्रोस्टानोलोन की पुष्टि के बाद नाडा ने उन पर आठ साल का लंबा प्रतिबंध लगाया।

इससे पहले वह 2022 में भी डोप अपराध के चलते तीन साल का बैन झेल चुकी थीं और 2025 में वापसी की थी। दोबारा उल्लंघन के बाद लगाया गया यह प्रतिबंध न सिर्फ उनके करियर के लिए बड़ा झटका है, बल्कि अन्य खिलाड़ियों के लिए भी एक सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

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FAQS

राजन कुमार किस खेल से जुड़े हैं?

क्रिकेट

धनलक्ष्मी पर कितने साल का बैन लगा?

8 साल

Vasu Jain

खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, एक कहानी है। मैं एक स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट हूँ, जो 2007 से क्रिकेट...

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