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टीम इंडिया क्यों कर रही टेस्ट मैचों में इतना स्ट्रगल? राहुल द्रविड़ ने अब जाकर बताया असली कारण

Rahul Dravid

Rahul Dravid explains india test cricket struggles : भारतीय क्रिकेट टीम लंबे समय से टेस्ट क्रिकेट में अपनी मजबूती और अनुशासन के लिए जानी जाती रही है, लेकिन पिछले एक साल में घरेलू परिस्थितियों में न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ मिली हार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक तरफ जहां भारतीय टीम टी20 इंटरनेशनल में हेड कोच गौतम गंभीर के अंडर शानदार प्रदर्शन कर रही है, वहीं टेस्ट फॉर्मेट में वही टीम आत्मविश्वास और निरंतरता के लिए जूझती नजर आई है। इसी मुद्दे पर भारत के पूर्व हेड कोच राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) ने खुलकर बात की है और आधुनिक क्रिकेट की सबसे बड़ी समस्या की ओर इशारा किया है।

फॉर्मेट बदलने से टूट रही तैयारी की लय

India coach Rahul Dravid to stand down after T20 World Cup - BBC Sport

राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) के मुताबिक आज के दौर में तीनों फॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती एक फॉर्मेट से दूसरे फॉर्मेट में जल्दी ढलना है। उन्होंने बताया कि कई बार टीम टेस्ट मैच से सिर्फ तीन-चार दिन पहले ही वेन्यू पर पहुंचती है। ऐसे में जब खिलाड़ी प्रैक्टिस शुरू करते हैं, तो यह सामने आता है कि उन्होंने आखिरी बार लाल गेंद से चार या पांच महीने पहले क्रिकेट खेला था। यह स्थिति टेस्ट क्रिकेट जैसी कठिन फॉर्मेट के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होती है।

लाल गेंद की स्किल्स को वक्त न मिलना

टेस्ट क्रिकेट में घंटों तक सीमिंग या टर्निंग विकेट पर टिककर खेलना आसान नहीं होता। इसके लिए तकनीक, धैर्य और अभ्यास की जरूरत होती है। द्रविड़ ने साफ कहा कि लाल गेंद से खेलने की स्किल्स तभी निखरती हैं जब खिलाड़ी को उसके लिए पर्याप्त समय मिले। आज के व्यस्त शेड्यूल में खिलाड़ी लगातार सफेद गेंद का क्रिकेट खेलते रहते हैं, जिससे लाल गेंद की बारीकियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं और इसका असर सीधे टेस्ट प्रदर्शन पर दिखता है।

पुराने दौर और मौजूदा क्रिकेट का फर्क

राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) ने अपनी पीढ़ी का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय सिर्फ दो फॉर्मेट हुआ करते थे और फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट का दबाव नहीं था। टेस्ट सीरीज़ से पहले कई बार उन्हें पूरे एक महीने तक सिर्फ लाल गेंद से अभ्यास करने का मौका मिलता था। यही वजह थी कि खिलाड़ी मानसिक और तकनीकी रूप से टेस्ट क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार होकर उतरते थे, जबकि आज यह लग्ज़री लगभग खत्म हो चुकी है।

शुभमन गिल के अनुभव से साफ संकेत

द्रविड़ (Rahul Dravid) ने यह भी बताया कि मौजूदा कप्तान शुभमन गिल ने हाल ही में इसी समस्या की ओर इशारा किया था। तीनों फॉर्मेट खेलने के बाद शुभमन को खुद एहसास हुआ कि टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार होना कितना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। लगातार मैच खेलने के कारण लाल गेंद की तैयारी को पूरा समय नहीं मिल पाता और यही कारण हो सकता है कि हाल के दिनों में कई स्टार बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष करते दिखे हैं।

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FAQS

टीम इंडिया किस फॉर्मेट में ज़्यादा संघर्ष कर रही है?

टेस्ट

Vasu Jain

खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, एक कहानी है। मैं एक स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट हूँ, जो 2007 से क्रिकेट...

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