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क्या टीम इंडिया फिर से दोहराएगा इतिहास? सेमीफाइनल की राह में NRR बना रोड़ा, 2012 की कहानी आई याद

Team India

Team India in T20 World Cup 2026 : टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 चरण में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली करारी हार ने टीम इंडिया की सेमीफाइनल की राह को बेहद कठिन बना दिया है। सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली भारतीय टीम अब ऐसी स्थिति में खड़ी है जहां सिर्फ अच्छा प्रदर्शन काफी नहीं, बल्कि बड़े अंतर से जीत भी जरूरी हो गई है।

टूर्नामेंट में आगे बढ़ने की उम्मीदें अब सिर्फ जीत पर नहीं, बल्कि नेट रनरेट पर भी टिकी हैं। मौजूदा हालात ने भारतीय फैंस को 2012 के टी20 वर्ल्ड कप की याद दिला दी है, जब शानदार जीतों के बावजूद भारत को नेट रनरेट के कारण बाहर होना पड़ा था।

सुपर-8 में उलझा गणित और टीम इंडिया की चुनौती

India At T20 World Cup 2026: Men In Blue's Top Moments From The Group Stage  - In Photos | Outlook India

सुपर-8 चरण में भारत को अब अपने दोनों बचे मुकाबले हर हाल में जीतने होंगे। 26 फरवरी को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में जिम्बाब्वे से मुकाबला और 1 मार्च को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच भारतीय टीम के लिए निर्णायक साबित होंगे। हालांकि दोनों मैच जीतने के बाद भी भारत की किस्मत पूरी तरह उसके हाथ में नहीं रहेगी।

अगर वेस्टइंडीज जिम्बाब्वे के साथ-साथ दक्षिण अफ्रीका को भी हरा देती है और दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे को पराजित कर देती है, तो तीन टीमों के समान अंक हो सकते हैं। ऐसे में फैसला नेट रनरेट से होगा। भारत का मौजूदा नेट रनरेट -3.80 है, जो बड़ी चिंता का विषय है।

इतनी खराब स्थिति से उबरने के लिए भारत को सिर्फ जीत नहीं, बल्कि बड़े अंतर से जीत दर्ज करनी होगी। यदि दक्षिण अफ्रीका वेस्टइंडीज को हरा दे और भारत अपने दोनों मैच जीत ले, तो चार अंकों के साथ भारत सीधे सेमीफाइनल में पहुंच सकता है और नेट रनरेट की जटिलता से बच सकता है।

क्या फिर दोहराएगा 2012 का दर्दनाक इतिहास?

points table

भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के मन में 2012 का टी20 वर्ल्ड कप अब भी ताजा है। उस टूर्नामेंट में भारत ने लीग चरण में इंग्लैंड और अफगानिस्तान को हराकर शानदार शुरुआत की थी। सुपर-8 के पहले मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 9 विकेट से हार ने टीम का नेट रनरेट बुरी तरह गिरा दिया। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान को 8 विकेट से और दक्षिण अफ्रीका को 1 रन से हराया, लेकिन खराब नेट रनरेट के चलते वह ग्रुप-2 में तीसरे स्थान पर रहा और सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सका।

उस बार भी भारतीय टीम के प्रदर्शन में कमी नहीं थी, लेकिन एक बड़ी हार ने पूरे अभियान को पटरी से उतार दिया। यही वजह है कि मौजूदा परिदृश्य 2012 की कहानी की याद दिला रहा है। एक बार फिर भारत को सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि मजबूत मार्जिन के साथ जीत दर्ज करनी होगी।

घरेलू सरजमीं पर दबाव और उम्मीदें

घरेलू परिस्थितियों में खेल रही टीम इंडिया से फैंस को बड़ी उम्मीदें हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार ने रणनीति, टीम संयोजन और बल्लेबाजी क्रम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब हर मुकाबला ‘करो या मरो’ जैसा बन चुका है। खिलाड़ियों पर मानसिक दबाव भी कम नहीं होगा, क्योंकि उन्हें सिर्फ विपक्षी टीम से नहीं, बल्कि आंकड़ों से भी लड़ना है।

अगर भारतीय टीम अपने प्रदर्शन में आक्रामकता और संतुलन दोनों दिखाती है, तो वह हालात बदल सकती है। लेकिन जरा सी चूक 2012 की तरह फिर से इतिहास दोहरा सकती है। सेमीफाइनल की राह अब सिर्फ खेल से नहीं, बल्कि गणित और नेट रनरेट की पेचीदगियों से भी तय होगी।

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FAQS

भारत का अगला मुकाबला किससे है?

जिम्बाब्वे

1 मार्च को भारत किससे खेलेगा?

वेस्टइंडीज

Vasu Jain

खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, एक कहानी है। मैं एक स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट हूँ, जो 2007 से क्रिकेट...

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