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भारतीय क्रिकेट टीम में नहीं मिली जगह, तो बिहार का क्रिकेटर बना UAE क्रिकेट टीम का हिस्सा

भारतीय क्रिकेट टीम में नहीं मिली जगह, तो बिहार का क्रिकेटर बना UAE क्रिकेट टीम का हिस्सा

Bihar’s Cricketer In UAE Team: यूएई की टीम टी-20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर हो गई लेकिन उसके चमकते सितारे सोहैब खान का नाम अब क्रिकेट जगत में एक होनहार बल्लेबाज़ के रूप में उभरा है। 27-साल के सोहैब का जन्म बिहार के गया जिले के कोठी नामक छोटे से गाँव में हुआ था, जो पहले माओवादी प्रभावित इलाकों में से एक रहा है। कोविड-19 से पहले तक यह गाँव क्रिकेट के नाम पर शायद ही किसी ने सुना हो, लेकिन सोहैब की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर ला खड़ा किया।

UAE के इस खिलाड़ी ने सबसे पहले कनाडा के खिलाफ 29 गेंदों में चार चौके और चार छक्कों की मदद से 51 रनों की पारी खेली। वहीं, फिर अफगानिस्तान जैसी मुख्य टीम के खिलाफ 48 गेंदों में 68 रन बनाए। इस तरह लगातार दो फिफ्टी बनाकर सोहैब ने खुद को चर्चा में ला दिया और फिर पता चला कि उनके संघर्ष की कहानी आसान नहीं रही है।

कोठी किंग्स क्रिकेट क्लब: सोहैब के लिए सपना सच करने का मंच

भारतीय क्रिकेट टीम में नहीं मिली जगह, तो बिहार का क्रिकेटर बना UAE क्रिकेट टीम का हिस्सा

सोहैब खान और उनके बड़े भाई अलतमन खाँ ने 2020 में कोठी किंग्स क्रिकेट क्लब की स्थापना की थी। यह क्लब उन्होंने अपने परिवार की ज़मीन पर कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान बनाया था ताकि गाँव के बच्चे क्रिकेट सीख सकें और बड़े मंचों पर खेलने का मौका पा सकें। यह क्लब सिर्फ एक खेल संस्थान नहीं रहा, बल्कि एक प्रेरणा का केंद्र बन गया। वहाँ आज तक करीब 15 युवा क्रिकेटरों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से कुछ अब UAE में जॉब और खेलने के अवसर पा चुके हैं। इस क्लब का उद्देश्य सिर्फ खेल सिखाना नहीं, बल्कि गाँव के युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करना भी रहा है।

सोहैब खुद बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान घर पर रहकर उन्होंने अपने गाँव और जड़ों से एक गहरा जुड़ाव महसूस किया। उन्होंने क्रिकेट को गाँव में पेश किया ताकि युवा सिर्फ शहरों में अवसर खोजने के बजाय अपने गाँव से ही आगे बढ़ सकें। इस खिलाड़ी के पिता अदीब “जुगनू” खान, जिन्होंने कभी शहर में नौकरी की बजाय खेती और अपने बच्चों के सपनों को प्राथमिकता दी, उनका मानना है कि उन्होंने अपने बेटे की उम्मीदों को कभी नहीं तोड़ा और आज यह गाँव उनके बेटे की वजह से अंतरराष्ट्रीय पहचान पा रहा है।

संघर्ष, दृढ़ता और UAE तक की यात्रा

सोहैब खान की क्रिकेट यात्रा सहज नहीं थी। उन्होंने गया और दिल्ली के बोर्डिंग स्कूलों में पढ़ाई और क्रिकेट का अभ्यास किया। 2018–19 के बीच उन्होंने रणजी ट्रॉफी कैंप में हिस्सा लिया, लेकिन उन्हें टीम में अंतिम रूप से शामिल नहीं किया गया। 2021 में शादी के बाद सोहैब के सामने परिवार का पालन-पोषण और क्रिकेट के प्रति जुनून के बीच एक बड़ा फैसला लेना था। उन्होंने अपने क्रिकेट सपने को जिंदा रखने के लिए UAE चला जाना चुना और वहां दिन में नौकरी और रात में क्रिकेट खेलते हुए अपने लक्ष्य की तरफ़ बढ़ते रहे।

UAE में शुरुआती छह महीने आर्थिक रूप से कठिन थे। उन्हें पिता और दोस्तों से पैसे उधार लेने पड़े। धीरे-धीरे उन्होंने निवेश कंपनी में वित्तीय सलाहकार के रूप में काम पक्का किया और रात में क्रिकेट खेलने का नियमित कार्यक्रम बनाया। सोहैब को यूएई क्रिकेट सर्कल में प्रसिद्ध कोच नौशाद आलम का मार्गदर्शन मिला, जिन्होंने उनके अंदर की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने का भरोसा दिया।

लगातार मेहनत और खेल में सुधार के फलस्वरूप, सोहैब को अक्तूबर 2025 में वनडे डेब्यू का मौका मिला और बाद में टी-20 इंटरनेशनल में भी उन्हें जगह मिली। इसके बाद वो अब टी20 वर्ल्ड कप भी खेले। इस तरह सोहैब ने साबित कर दिया कि मेहनत के दम पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है। यूएई की टीम के लिए सोहैब ने अभी तक 4 वनडे और 6 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं। इस दौरान वनडे में उन्होंने 56 और टी20आई में 146 रन बनाए हैं।

FAQs

सोहैब खान ने यूएई के लिए अपना डेब्यू कब किया था?
2025

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Prashant Kumar

प्रशांत कुमार क्रिकेट के लेखक हैं, जो इस क्षेत्र में पांच साल से ज्यादा का अनुभव...

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