Pre-Seeding Controversy: ICC के टूर्नामेंट में किसी भी एक टीम को फायदा मिलने की गुंजाईश नहीं रहती, क्योंकि सभी के आधार पर चीजें तय की जाती हैं। ऐसा ही कुछ टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए किया गया था लेकिन इस बार यह दांव उल्टा पड़ गया। क्रिकेट के खेल का संचालन करने वाली इस संस्था को टूर्नामेंट में प्री-सीडिंग को लेकर आलोचनाओं का शिकार होना पड़ रहा है।
प्री-सीडिंग (Pre-Seeding) को लेकर आईसीसी के साथ-साथ टीम इंडिया को भी घेरा जा रहा है, जबकि उसे इससे कोई खास फायदा नहीं हुआ। लेकिन आरोप लग रहे हैं कि जय शाह की अध्यक्षता वाली संस्था ने जानबूझकर टी20 वर्ल्ड कप में पहले से ही टीमों की प्री-सीडिंग तय कर दी, ताकि भारत को पता रहे कि वो कहाँ खेलने वाला है और उसकी विरोधी टीमें कौन ही होंगी। चलिए आपको इस मामले में विस्तार से बताते हैं।
क्या होती है प्री-सीडिंग (Pre-Seeding) और टी20 वर्ल्ड कप में सुपर-8 के लिए कैसे टीमों को ग्रुप में किया गया विभाजित

काफी सारे लोगों को पता होगा कि प्री-सीडिंग (Pre-Seeding) क्या होती है लेकिन जिसे नहीं पता है, उसे बता दें कि यह एक सिस्टम होता है, जिसके तहत टीमों को किसी टूर्नामेंट के दूसरे राउंड में विभाजित किया जाता है। प्री-सीडिंग तय होने से यह फर्क नहीं पड़ता है कि टॉप 2 में रहने वाली टीमों में कौन पहले स्थान पर है और कौन दूसरे। उन्हें ग्रुप स्टेज में अपनी पोजीशन के बावजूद, अगले राउंड में उसी ग्रुप में जाना होगा, जिसमें उसकी प्री-सीडिंग तय हुई है।
ICC ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप शुरू होने से काफी पहले टीमों की प्री-सीडिंग (Pre-Seeding) तय कर दी थी, क्योंकि टूर्नामेंट भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में हो रहा है, ऐसे में टीमों को लॉजिस्टिक संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े। आईसीसी ने भारत को X1, ऑस्ट्रेलिया को X2, वेस्टइंडीज को X3 और दक्षिण अफ्रीका को X4 प्री-सीडिंग दी थी। वहीं, इंग्लैंड को Y1, न्यूजीलैंड को Y2, पाकिस्तान को Y3 और श्रीलंका को Y4 में स्लॉट किया था। यदि इनमें से कोई भी टीम क्वालीफाई करने में विफल रहती है, तो रिप्लेसमेंट टीम को वह स्थान मिल जाता है, जैसे कि जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया बाहर होने के बाद X2 के रूप में उसका स्थान ले लिया।
हालांकि, प्री-सीडिंग के कारण लॉजिस्टिक की समस्या तो काफी हद तक कम हो गई लेकिन सुपर-8 में कुछ ऐसी स्थिति बन गई, जिसके कारण इस सिस्टम पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
ICC और टीम इंडिया पर प्री-सीडिंग (Pre-Seeding) को लेकर उठ रहे सवाल
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए जो प्री-सीडिंग (Pre-Seeding) तय की गई थी, उसके आधार पर ग्रुप स्टेज में पहला स्थान हासिल करने वाली सभी चार टीमें एक ही समूह में हैं। यानी X ग्रुप काफी मुश्किल बन गया है, क्योंकि इसमें भारत, दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज है। इन सभी ने ग्रुप स्टेज के दौरान अपने-अपने ग्रुप में टॉप किया था। वहीं, दूसरे ग्रुप यानी Y में सभी टीमें वो हैं, जो ग्रुप स्टेज में दूसरे स्थान पर रही थीं। इसी वजह से ICC की आलोचना हो रही है।
ICC के साथ-साथ टीम इंडिया को भी घेरा जा रहा है, क्योंकि चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के दौरान भारत के पाकिस्तान खेलने से जाने के लिए मना करने के कारण ही उस टूर्नामेंट में भी प्री-सीडिंग तय की गई थी। इसी वजह से टीमों को दुबई में आकर खेलना पड़ा था। ऐसे में फिर से आरोप लग रहे हैं कि इस बार भी भारत का ही फेवर किया गया है लेकिन यह बात पूरी तरह से सही नहीं कही जा सकती है, क्योंकि टीम इंडिया के साथ-साथ अन्य टीमों को भी प्री-सीडिंग (Pre-Seeding) के कारण पहले से ही पता था कि सुपर-8 के दौरान उन्हें कहां खेलना है। ऐसे में आईसीसी की आलोचना जायज है लेकिन भारत को गलत ठहराना सही नहीं कहा जा सकता है।
FAQs
ICC ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीमों की प्री-सीडिंग किस आधार पर निर्धारित की थी?
प्री-सीडिंग के कारण सुपर-8 के किस ग्रुप में पहले स्थान पर रहने वाली सभी चार टीमें हैं?
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