भारत और पाकिस्तान (IND vs PAK) के बीच पिछले कई सालों से राजनीतिक तनाव, सीमा विवाद और आतंकवाद जैसे मुद्दों के चलते द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज नहीं खेली जाती। दोनों टीमें अब केवल ICC और एशिया कप जैसे बड़े टूर्नामेंट्स में ही आमने-सामने दिखाई देती हैं। अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक और ऐसी ही स्थिति बनती नजर आ रही है, जहां इंग्लैंड और अफगानिस्तान के बीच क्रिकेट रिश्तों पर संकट गहरा गया है।
इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने साफ कर दिया है कि अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के साथ हो रहे व्यवहार को देखते हुए इंग्लैंड आगे भी अफगानिस्तान के खिलाफ कोई द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज नहीं खेलेगा।
महिलाओं के अधिकारों को लेकर ECB का सख्त रुख
ECB चेयरमैन रिचर्ड थॉम्पसन ने अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति को लैंगिक भेदभाव का मामला बताया है। उनका कहना है कि महिलाओं को शिक्षा, सार्वजनिक जीवन और खेलों से दूर रखना अंतरराष्ट्रीय खेल भावना के खिलाफ है। ECB का मानना है कि क्रिकेट सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रह सकता और उसे सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझना होगा।
अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद अफगानिस्तान में महिलाओं पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। इनमें महिलाओं के संगठित खेलों में भाग लेने पर रोक भी शामिल है। इसी वजह से इंग्लैंड बोर्ड ने अफगानिस्तान के खिलाफ किसी भी टेस्ट, वनडे या टी20 द्विपक्षीय सीरीज से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया भी पहले ले चुका है बड़ा फैसला
इंग्लैंड अकेला ऐसा देश नहीं है जिसने अफगानिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया हो। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भी 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान के खिलाफ अपनी द्विपक्षीय सीरीज रद्द कर दी थी। ऑस्ट्रेलिया ने साफ कहा था कि जब तक महिलाओं को खेलों में बराबरी का अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक सामान्य क्रिकेट संबंध संभव नहीं हैं।
अब इंग्लैंड का फैसला यह दिखाता है कि कई बड़े क्रिकेट बोर्ड इस मुद्दे पर एक जैसी सोच रखते हैं। हालांकि, ICC टूर्नामेंट्स में स्थिति अलग रहती है क्योंकि वहां किसी टीम के खेलने से इनकार करने पर नियमों और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
चैंपियंस ट्रॉफी मैच खेलने पर भी उठे सवाल
पिछले साल इंग्लैंड ने अफगानिस्तान के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी का मुकाबला खेला था, जिस पर काफी चर्चा हुई थी। ECB ने तब स्पष्ट किया था कि वह मैच ICC टूर्नामेंट का हिस्सा था और उससे हटने पर टीम को भारी नुकसान हो सकता था। इसी कारण इंग्लैंड ने टूर्नामेंट मैच खेला, लेकिन बोर्ड ने यह भी दोहराया कि ICC आयोजनों से अलग होने वाली द्विपक्षीय सीरीज में वह अफगानिस्तान के खिलाफ नहीं उतरेगा।
इस फैसले ने यह साफ कर दिया कि इंग्लैंड ICC के नियमों और अपने नैतिक रुख के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। बोर्ड का कहना है कि किसी एक देश के बजाय ICC को इस मुद्दे पर सामूहिक कदम उठाने चाहिए।
ICC नियमों और भविष्य के शेड्यूल पर बढ़ी चिंता
इस पूरे विवाद ने ICC के नियमों को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। ICC के पूर्ण सदस्य देशों से महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने की उम्मीद की जाती है, लेकिन अफगानिस्तान अब तक मान्यता प्राप्त महिला टीम नहीं बना पाया है। यही वजह है कि कई क्रिकेट बोर्ड लगातार सवाल उठा रहे हैं।
आने वाले समय में यह मामला और जटिल हो सकता है। ICC की प्रस्तावित नई वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप संरचना में अफगानिस्तान को बाकी टेस्ट खेलने वाले देशों के साथ एक ही डिवीजन में शामिल किए जाने की संभावना है। अगर ऐसा होता है, तो भविष्य में इंग्लैंड और अफगानिस्तान के बीच मैच शेड्यूल को लेकर नई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
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