Pakistan’s legend announced retirement: हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में व्हाइटवॉश का सामना करने वाली पाकिस्तान टीम को 30 मई से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज अपने घर पर खेलनी है। 4 जून तक चलने वाली इस सीरीज का पहला मैच रावलपिंडी में होगा। जबकि शेष दो मैच लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में होंगे। इस सीरीज की शुरुआत से पहले पाकिस्तान टीम के लिए एक बुरी खबर आई है, क्योंकि उनके सबसे बड़े समर्थक ने संन्यास का ऐलान कर दिया है।
जी हां, पाकिस्तान (Pakistan) के सबसे बड़े फैन के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले ‘चाचा क्रिकेट’ ने घोषणा कर दी है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लाहौर में होने वाला तीसरा वनडे अंतिम मौका होगा, जब वे घरेलू मैदान में अपनी टीम की हौसलाअफजाई करेंगे। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि वे अगस्त में इंग्लैंड दौरे पर अपनी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए मौजूद रहेंगे।
पाकिस्तान (Pakistan) के सबसे बड़े चीयरलीडर ‘चाचा क्रिकेट’ ने किया संन्यास का ऐलान

कुछ फैन ऐसे होते हैं, जो जीत या हार की परवाह किए बिना, अपनी टीम को हमेशा सपोर्ट करते हैं। ‘चाचा क्रिकेट’ जिनका असली नाम अब्दुल जलील है, उनकी भी पाकिस्तान (Pakistan) के लिए ऐसी ही दीवानगी है। उन्होंने अपने देश में होने वाले मैचों के साथ-साथ विदेशों में जाकर भी अपनी टीम का समर्थन किया। इस दौरान कई ट्रॉफियों का जश्न उन्होंने देखा। वहीं, कई दिल तोड़ने वाली हार के भी गवाह रहे।
लाहौर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पाकिस्तान (Pakistan) की वनडे सीरीज का तीसरा वनडे उनके लिए एक फुल सर्किल जैसा रहेगा, क्योंकि उन्होंने पहली बार इसी मैदान पर कोई मैच देखा था, जब 1968-69 में इंग्लैंड ने पाकिस्तान का दौरा किया था। इसके बाद 1980 और 90 के दशक में उन्हें नियमित रूप से शारजाह के मैदान में देखा जाने लगा। गहरे हरे रंग के कुर्ते और टोपी ने उन्हें अलग ही पहचान दिलाई।
चाचा ने यूएई में अपनी नौकरी छोड़कर पाकिस्तान का फुल टाइम मैस्कॉट बनने का फैसला किया और 1999 वर्ल्ड कप के लिए वसीम अकरम की अगुवाई वाली टीम का हौसला बढ़ाने के लिए इंग्लैंड की यात्रा की, जिसके बाद वे क्रिकेट जगत में एक जाना-पहचाना चेहरा बन गए।
रेस्टोरेंट और म्यूजियम खोलने की इच्छा
77 वर्षीय अब्दुल जलील अपने गृहनगर सियालकोट के बाहरी इलाके में एक रेस्तरां और संग्रहालय खोलने का सपना पूरा करना चाहते हैं। ईएसपीएन क्रिकइंफो को जलील ने बताया,
“मैंने वर्षों से जो भी यादगार चीजें जमा की हैं, उन्हें मैं संग्रहालय में प्रदर्शित करूंगा। मेरा लक्ष्य पाकिस्तान के लिए 500 मैच देखना था, जिसे मैंने हासिल कर लिया है। मैंने खेल और पाकिस्तान के प्रति अपने अटूट प्रेम के लिए सब कुछ कर लिया है। मेरा मिशन देश का एक महान राजदूत बनना और सभी प्रशंसकों को खुश करना रहा है। अब मैं रिटायरमेंट के बाद कुछ कल्याणकारी कार्य भी करना चाहता हूं।”
भारत के खिलाफ पाकिस्तान (Pakistan) की इन दो हार पर जताया दुख
अब्दुल जलील लंबे समय से पाकिस्तान टीम (Pakistan Team) के समर्थक रहे हैं। इस वजह से उन्होंने वो दौर भी देखा है, जब भारत के खिलाफ पाकिस्तान का दबदबा होता था। 1986 में जब चेतन शर्मा के खिलाफ जावेद मियांदाद ने आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर जीत दिलाई थी, तब चाचा मैदान पर ही मौजूद थे। उन्होंने इस पल को खास बताया। वहीं, 2017 चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत के खिलाफ मिली जीत को भी यादगार बताया।
हालांकि, उन्हें भारत के खिलाफ पाकिस्तान (Pakistan) की दो खास हार का बड़ा अफ़सोस है, जो 2024 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप में मिली थीं। इनके बारे में उन्होंने कहा,
“वे न्यूयॉर्क में भारत के खिलाफ 120 रनों का पीछा नहीं कर सके। मैं टीम का समर्थन करने के लिए बहुत दूर से यात्रा करके आया था। उस मैच के लिए मैंने एक लंबी और मुश्किल यात्रा की। मैं श्रीलंका से कराची, फिर सियालकोट गया और उसके बाद भारत में दाखिल हुआ। हम वह मैच जीत सकते थे, लेकिन गलतियां हो जाती हैं। जीत और हार खेल का हिस्सा हैं।”
FAQs
पाकिस्तान के चाचा का आखिरी घरेलू मैच कौन सा होगा?
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