Chinnaswamy tickets sell in black market: भारत में क्रिकेट का खेल धर्म की तरह माना जाता है और फैंस भी मुकाबलों को देखने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। यह दीवानगी पहले सिर्फ टीम इंडिया के लिए ही देखने को मिलती थी लेकिन जब से आईपीएल आया है, प्रशंसक अपनी पसंदीदा टीम और खिलाड़ी का समर्थन करने के लिए भी स्टेडियम जाते हैं। वैसे तो सभी टीमों के फैंस काफी ज्यादा हैं लेकिन कुछ के लिए बहुत ही अलग लेवल का क्रेज देखने को मिला है।
ऐसा ही कुछ रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के साथ होता है। RCB ने जब आईपीएल के पहले 17 सीजन में एक भी खिताब नहीं जीता था, तब भी स्टेडियम में दर्शक बड़ी मात्रा में टीम का समर्थन करने आते थे और अब तो टीम एक बार टाइटल अपने नाम कर चुकी है। इसी वजह से गत विजेता को मैदान में खेलते देखने के लिए फैंस के बीच टिकटों (Tickets) की मारामारी भी देखने को मिल रही है और इसका फायदा कालाबाजारी करने वाले लोगों को मिल रहा है।
चिन्नास्वामी स्टेडियम में RCB के मैचों की टिकटों (Tickets) की कालाबाजारी का हुआ भंडाफोड़

आईपीएल 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का प्रदर्शन बहुत ही शानदार रहा है और टीम ने अपने पांच में से एक ही मैच में हार का सामना किया है। इस दौरान बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में आरसीबी ने अभी तक अपने तीनों ही मुकाबले जीते हैं। इसी वजह से फैंस का बेंगलुरु में रजत पाटीदार की टीम को खेलते देखने के लिए काफी उत्साह है और टिकटों (Tickets) के लिए बहुत ही ज्यादा मारामारी भी हो रही है।
हालांकि, चिन्नास्वामी स्टेडियम में दर्शकों के बैठने की क्षमता करीब 40000 है। इसके बावजूद टिकटों (Tickets) को लेकर दर्शकों के बीच होड़ रहती है। इसी का फायदा उठाकर RCB के घरेलू मैचों की टिकटों को ब्लैक मार्किट में काफी ज्यादा कीमत में बेचा जा रहा था। इस पूरे मामले में एक कैंटीन वर्कर की अहम भूमिका पाई गई है, जो बड़ी मात्रा में टिकटों की कालाबाजारी कर रहा था लेकिन अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।
कैंटीन वर्कर के पास से 100 टिकट (Tickets) किए गए जब्त
पुलिस ने चिन्नास्वामी स्टेडियम के अंदर श्री लक्ष्मी कैटरर्स में कार्यरत खानपान कर्मचारी 49 वर्षीय चंद्रशेखर पी को 15 अप्रैल को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) और लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) के बीच हुए मैच के दौरान आईपीएल टिकट बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने बताया कि उसके पास से 100 से अधिक टिकट (Tickets) बरामद हुए, जो कथित तौर पर कॉर्पोरेट बुकिंग के माध्यम से प्राप्त किए गए थे और स्टेडियम के बाहर ऊंची कीमतों पर दोबारा बेचे जाने के लिए भेजे गए थे। चंद्रशेखर को मूल दरों से कहीं अधिक, 15,000 रुपये से 19,000 रुपये के बीच की कीमतों पर टिकट बेचने की कोशिश करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि टिकट निजी कंपनियों के माध्यम से थोक आवंटन द्वारा प्राप्त किए गए थे, जिनमें से लगभग 50-50 टिकट कथित तौर पर दो कॉर्पोरेट संस्थाओं से जुड़े थे। पुलिस ने एक अन्य आरोपी गणेश हरिकेश की भी पहचान की है, जो फिलहाल फरार है और माना जाता है कि वह मुख्य संचालक था जिसने कॉर्पोरेट संस्थाओं और ऑनलाइन चैनलों के माध्यम से टिकट प्राप्त किए, जबकि चंद्रशेखर ने स्टेडियम के पास टिकटों की पुनर्विक्री का काम संभाला।
17.52 लाख रुपये के 181 टिकटों के गबन का मामला भी सामने आया
इसके अलावा पुलिस ने अपनी एक अन्य जांच में लगभग 17.52 लाख रुपये मूल्य के 181 टिकटों के गबन से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का भी पता लगाया। आरोप है कि ये टिकट थोक बुकिंग चैनलों के माध्यम से प्राप्त किए गए थे और बाद में बिचौलियों के माध्यम से काला बाजार में पहुंचाए गए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि कॉरपोरेट कोटा आवंटन अवैध पुनर्विक्रय नेटवर्क के लिए एक प्रमुख आपूर्ति चैनल के रूप में कार्य करता है।
जांच से पता चलता है कि एम-टिकटिंग ने काउंटर और व्यक्तिगत स्तर पर टिकटों की पुनर्विक्रय को कम किया है, लेकिन इस अवैध पुनर्विक्रय मार्ग को पूरी तरह से बंद नहीं किया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कंपनी के नाम पर बुक किए गए थोक टिकटों को वैध कर्मचारियों या अंतिम उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने से पहले ही पुनर्निर्देशित किया जा रहा है, जिससे काला बाजारी के लिए एक समानांतर आपूर्ति श्रृंखला प्रभावी रूप से बनी हुई है।
इस तरह पुलिस आईपीएल के दौरान लगातार टिकटों की कालाबाजारी को लेकर नकेल कसने में लगी हुई है, ताकि दर्शकों को आसानी से उचित मात्रा में टिकट मिल सकें और उन्हें ब्लैक मार्किट का रास्ता ना अपनाना पड़े।
FAQs
RCB ने चिन्नास्वामी स्टेडियम के किस कैंटीन वर्कर को टिकेटों की कालाबाजारी में पकड़ा है?
चंद्रशेखर पी किस मैच के टिकट ऊंची कीमत पर बेचते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया?
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