IPL Loan Rule: आईपीएल का 19वां सीजन खेला जा रहा है और लीग में अभी तक सारे नियम देखने को मिले हैं। फैंस को इनके बारे में काफी जानकारी है लेकिन कुछ रूल ऐसे हैं, जिनका इस्तेमाल ज्यादा नहीं होता है और उनके बारे में बहुत ज्यादा बताया भी नहीं गया है। ऐसे ही आईपीएल का लोन रूल है, जो कई सीजन से बना हुआ है लेकिन इस बार एकदम से चर्चा में आ गया, जिसकी वजह रविचंद्रन अश्विन हैं।
दरअसल, मौजूदा सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स समेत कई टीमें खिलाड़ियों की इंजरी से परेशान हैं। इसी वजह से अश्विन ने ट्वीट करते हुए RCB के स्क्वाड में शामिल विहान मल्होत्रा को लोन पर लेने की बात कही। अश्विन ने किसी टीम को डायरेक्ट मेंशन नहीं किया लेकिन माना जा रहा है कि उन्होंने यह सुझाव चेन्नई सुपर किंग्स को दिया है। इसी वजह से IPL में लोन रूल क्या है, चर्चा का विषय बन गया तो चलिए हम आपको पूरी जानकारी देते हैं।
IPL में लोन रूल क्या है?

आईपीएल का संचालन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा किया जाता है और सभी नियम इसी के द्वारा बनाए जाते हैं। साल 2018 में BCCI ने IPL में लोन रूल की शुरुआत की थी। 2018 में सीज़न के बीच में 5 दिन की अवधि खुली थी, जिसमें केवल अनकैप्ड खिलाड़ियों को ही उधार लिया जा सकता था। एक साल बाद यानी अगले सीजन फ्रेंचाइजी को कैप्ड खिलाड़ियों को भी उधार लेने की अनुमति मिल गई।
इस नियम के तहत IPL फ्रेंचाइजी को सीजन के दौरान सीमित अवधि के लिए खिलाड़ी को लोन पर लेने की छूट होती है। हालांकि, एक बार उधार लिया गया खिलाड़ी, सीजन के शेष समय के लिए उधार ली गई टीम के साथ ही रहता है। हालांकि, कोई भी फ्रेंचाइजी उस समय तक ही लोन रूल का इस्तेमाल कर सकती है, जब तक कि सीजन में 7 मैच न खेले हों। अगर इससे ज्यादा खेल लिए तो फिर लोन रूल के इस्तेमाल के लिए योग्य नहीं होगी।
किन खिलाड़ियों को IPL में लोन रूल के तहत दूसरी टीमें ले सकती हैं उधार?
BCCI के द्वारा IPL में लोन रूल को लागू तो किया गया लेकिन इसके साथ कुछ कंडीशन भी जोड़ी। इस नियम के तहत किसी भी खिलाड़ी को लोन नहीं किया जा सकता है, बल्कि उन खिलाड़ियों को ही उधार दिया जा सकता है, जिन्होंने सीजन में दो से ज्यादा मैच न खेले हों, चाहे प्लेइंग इलेवन में या चोटिल खिलाड़ी के स्थान पर। हालांकि, एक सीजन में कोई फ्रेंचाइजी 2 से ज्यादा खिलाड़ियों को लोन पर नहीं ले सकती है।
इसके अलावा, एक खिलाड़ी को एक सीज़न में केवल एक बार ही लोन पर भेजा जा सकता है। साथ ही, आईपीएल के नियमों के अनुसार, ऋण पर भेजा गया खिलाड़ी उस फ्रेंचाइजी के खिलाफ नहीं खेल सकता जिसने उसे लोन पर भेजा है।
उदाहरण के लिए अगर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु से विहान मल्होत्रा को चेन्नई सुपर किंग्स लोन करती है, तो फिर आरसीबी के खिलाफ इस सीजन मैच हुआ तो उसमें विहान को नहीं खिला पाएगी। खैर इस सीजन दोनों के बीच एक ही मैच होना था, जो 5 अप्रैल को खेला गया। इस मुकाबले में बेंगलुरु की टीम ने बाजी मारी थी।
IPL में लोन पर लिए गए खिलाड़ी का भुगतान कैसे होता है?
जिस भी खिलाड़ी को लोन पर भेजा जाएगा, उसे नीलामी के दौरान जिस भी टीम ने खरीदा होगा, भुगतान करेगी। वहीं, जो टीम खिलाड़ी को लोन लेगी, मैच के आधार पर फीस देगी। उदाहरण के लिए, विहान को RCB ने 30 लाख में खरीदा था। अगर वो CSK में चले जाते हैं तो भी यह धनराशि बेंगलुरु की टीम ही खिलाड़ी को देगी। वहीं, मैच फीस चेन्नई की टीम देगी।
खिलाड़ी को उधार लेने वाली फ्रेंचाइजी को लेन-देन के हिस्से के रूप में उधार देने वाली फ्रेंचाइजी के साथ आपसी सहमति से “लोन फीस” का भुगतान करना होगा। नियमों के अनुसार, यह लोन शुल्क आईपीएल सैलरी सीमा के अधीन नहीं है।
FAQs
IPL में लोन रूल की शुरुआत कब हुई थी?
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